SC में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास याचिका पर सुनवाई आज: NGO की मांग- नरसंहार की SIT जांच हो; घाटी छोड़ चुके लोगों की जनगणना करवाए सरकार

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2 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को घाटी में कश्मीरी हिंदुओं और सिखों के पुनर्वास की मांग वाली याचिका पर सुनवाई होगी। यह जनहित याचिका एक NGO की ओर से दायर की गई है। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच इस पर सुनवाई करेगी।

NGO ‘वी द सिटिजन्स’ ने अधिवक्ता बरुण कुमार सिन्हा के माध्यम से याचिका दायर की है। इसमें उन्होंने केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार से 90 के दशक में केंद्र शासित प्रदेश में हुए नरसंहार के बाद भारत के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले हिंदुओं और सिखों की जनगणना करने का निर्देश देने का अनुरोध किया है।

इसमें कहा गया है कि एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाए और साल 1989 से 2003 तक जम्मू-कश्मीर में हिंदुओं और सिखों के नरसंहार में शामिल और उनकी सहायता करने वाले और उकसाने वाले अपराधियों की पहचान की जाए। SIT की रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों पर मुकदमा चलाने का निर्देश दिया जाए। इसमें हाल के महीनों में कश्मीर घाटी में मारे गए कश्मीरी पंडितों की हत्या की जांच की भी मांग की गई है।

2017 में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज की
याचिका में आरोप लगाया गया है कि 1990 के बाद जो लोग अपनी अचल संपत्तियों को छोड़कर कश्मीर से चले गए हैं, वे भारत के अन्य हिस्सों में शरणार्थियों का जीवन जी रहे हैं। उन लोगों की पहचान कर उनका पुनर्वास किया जाए। इससे पहले साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट में 1989-90 में कश्मीरी पंडितों की हत्याओं की जांच की मांग वाली पुनर्विचार याचिका दायर की गई थी। इसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

कोर्ट ने आदेश में कहा था कि नरसंहार के 27 साल बाद सबूत जुटाना मुश्किल है। मार्च में दायर नई याचिका में कहा गया कि 33 साल बाद 1984 के दंगों (सिख दंगों) की जांच करवाई जा सकती है तो ऐसा ही इस मामले में भी संभव है।

नदीमर्ग में आतंकियों ने 23 मार्च 2003 की रात 24 कश्मीरी पंडितों को मौत के घाट उतार दिया था।

नदीमर्ग में आतंकियों ने 23 मार्च 2003 की रात 24 कश्मीरी पंडितों को मौत के घाट उतार दिया था।

नदीमर्ग नरसंहार केस री-ओपन होगा, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने दिया आदेश
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने पुलवामा के नदीमर्ग में हुए कश्मीरी पंडितों का नरसंहार केस दोबारा खोलने का आदेश दिया है। नदीमर्ग में 23 मार्च 2003 की रात को सेना की वर्दी पहनकर आए लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने 24 कश्मीरी पंडितों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इनमें 11 महिलाएं और दो साल का बच्चा भी शामिल था। हाईकोर्ट इस मामले की सुनवाई 15 सितंबर 2022 को करेगा। पढ़ें पूरी खबर…

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