54 साल का डोरेमोन, 46,000 करोड़ कमाई: पैदा होने के 100 साल पहले ही सरकार ने मनाया जन्मदिन, तोहफे में मिली थी जापान की नागरिकता

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8 मिनट पहलेलेखक: ईफत कुरैशी

डोरेमोन। एक छोटी सी रोबोटिक बिल्ली जिसका कब्जा भारत के हर घर की टीवी पर है। जी हां, हम कार्टून कैरेक्टर डोरेमोन की ही बात कर रहे हैं।

देखने में तो ये एक मामूली छोटी सी बिल्ली है, लेकिन इसकी असल उम्र पूरे 54 साल है। डोरेमोन को 1969 में बनाया गया था। दिलचस्प बात ये भी है कि डोरेमोन का जन्म असल में सन 2112 में होगा, ये फिलहाल फ्यूचर से नोबिता की जिंदगी आसान बनाने आया है।

दरअसल डोरेमॉन जितना टीवी पर दिखता है, उससे कहीं ज्यादा है। इस फ्रेंचाइजी की 41 फीचर फिल्म्स, 2 स्पेशल फिल्म्स, 15 शॉर्ट फिल्म्स समेत कई छोटी-मोटी फिल्में बनती रही हैं। इसकी शुरुआत एक कॉमिक बुक से हुई थी, जिसमें डोरेमोन की मजेदार कहानी दिखाई जाती थी। धीरे-धीरे डोरेमोन जापान का सबसे पॉपुलर कार्टून कैरेक्टर बन गया।

2012 में जापान सरकार ने डोरेमोन के जन्म के 100 साल पहले ही उसका बर्थडे सेलिब्रेट किया। इस सेलिब्रेशन के साथ ही सरकार ने डोरेमोन को जापान के कावासाकी शहर का ऑफिशियल रेसिडेंट भी घोषित किया था। संभवतः एक कार्टून कैरेक्टर को किसी देश की नागरिकता मिलने की ये पहली घटना थी।

इसकी पॉपुलैरिटी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इसकी फीचर फिल्मों ने दुनियाभर में अब तक 13 हजार करोड़ की कमाई की है और रॉयल्टी से इसकी कमाई 33 हजार करोड़ है, यानी कुल 46 हजार करोड़। 3 सितंबर को ही वो दिन था जब डोरेमोन बना, इसी दिन को इस कैरेक्टर का बर्थडे माना जाता है। भारत में डोरेमोन को 48 करोड़ लोग देखते हैं, जिनमें बच्चे और बड़े भी शामिल हैं।

भारत में ये कार्टून इतना पॉपुलर क्यों है? इस सवाल का जवाब हम 14 सालों तक डोरेमोन की वॉयस आर्टिस्ट रही सोनल कौशल से भी जानेंगे। साथ ही जानेंगे कि दुनिया भर में डोरेमोन का कारोबार कितना फैला हुआ है-

कैसे आया डोरेमोन बनाने का आइडिया?

डोरेमोन एक जापानी फिक्शनल कैरेक्टर है जिसे राइटर फुजीको एफ फुजियो ने तैयार किया था। राइटर फुजीको मांगा मैगजीन (जापान की ग्राफिकल कॉमिक है) के लिए कुछ नया करना चाहते थे। आइडिया की तलाश कर रहे फुजीको ने सोचा कि काश उनके पास कोई ऐसी मशीन होती जो उनकी परेशानियों का हल निकाल सकती। ये सोचते हुए वो बेटी के खिलौने में पैर लगने से गिर गए और उन्हें पड़ोस की बिल्लियों के लड़ने की आवाज सुनाई दीं। इन तीनों घटनाओं को मिलाकर उन्हें एक बिल्ली का कैरेक्टर बनाने का आइडिया आया, जिसके पास एडवांस गैजेट थे।

क्या है डोरेमोन का मतलब?

डोरेमोन एक मिला-जुला नाम है, जहां डोरा (Dora) का मतलब है स्ट्रे यानी आवारा, वहीं एमोन (Emon) जापानी पुरुषों का नाम है। तो इसका अर्थ हुआ आवारा पुरुष।

कैसे भारत पहुंचा डोरेमोन?

साल 2005 में डिज्नी इंडिया के हंगामा टीवी चैनल में डोरेमोन को प्रसारित किया गया। दर्शकों ने शो को खूब प्यार दिया और ये एवरग्रीन कार्टून बन गया। बढ़ती पॉपुलैरिटी को देखते हुए इसे हंगामा टीवी के अलावा डिज्नी चैनल पर भी प्रसारित किया जाने लगा।

डोरेमोन भारत में इतना पॉपुलर क्यों है, इस सवाल का जवाब भारत में करीब 14 साल तक डोरेमोन की आवाज रहीं सोनल कौशल से जानते हैं-

डोरेमोन भारत में इतना पॉपुलर क्यों है?

जवाब- डोरेमोन को भारत में इसलिए पसंद किया जाता है क्योंकि बहुत से बच्चे उससे बहुत अच्छी तरह कनेक्ट करते हैं। बच्चों को लगता है कि काश हमारे पास भी डोरेमोन होता, जो हमें गैजेट्स देता और हमारे काम आसान करता। हम कुछ भी कर पाते, अगर हमारे पास डोरेमोन होता। हर बच्चे को अपनी लाइफ में डोरेमोन चाहिए। इसलिए बच्चे दिल से कनेक्ट करते हैं और उसे पसंद करते हैं।

क्या डोरेमोन का बच्चों पर बुरा असर पड़ता है?

जवाब- मुझे लगता है बच्चों पर किसी भी चीज का बुरा असर पड़ सकता है। कई बार पेरेंट्स मुझसे कहते हैं कि नोबिता को देखकर हमारा बच्चा बहुत शरारती हो जाता है या जिद्दी हो जाता है। ये निर्भर करता है कि कौन सा बच्चा किस कैरेक्टर से इंस्पायर हो रहा है। मुझे लगता है कि हम अगर पॉजिटिव पर ध्यान दें तो हम पॉजिटिव से ही इंस्पायर होंगे।

डोरेमोन की आवाज बनने में क्या चैलेंजेस आए?

जवाब- जब मैंने डोरेमोन शुरू किया था तब मैं 13-14 साल की थी। तब मेरी नेचुरल आवाज बहुत क्यूट थी। करीब 10-14 साल तक मैंने उसकी डबिंग की। मुझे अपनी आवाज को काफी मॉड्यूलेट करना पड़ता था। उस आवाज को मेंटेन करने के लिए काफी बदलाव करने पड़ते थे। ये मैंने अपनी जॉब और माइक से ही सीखा। ये मेरे लिए एक बेहतरीन एक्सपीरिएंस रहा। मेरे लिए ये ज्यादा मुश्किल नहीं था, मुझे बस अपनी आवाज क्यूट बनानी थी।

कैसे डोरेमोन की आवाज बनीं?

जवाब- डोरेमोन की आवाज बनने के लिए कई बच्चों ने ऑडिशन दिया था। सब हर कैरेक्टर के लिए ऑडिशन दे रहे थे और मेरी आवाज को डोरेमोन के लिए सलेक्ट किया गया। जापानी में डोरेमोन की आवाज काफी रोबोटिक थी और मैं उस आवाज के काफी करीब थी। कुछ समय बाद उन्हें मेरी नेचुरल आवाज इतनी पसंद आई कि उन्होंने कहा कि हम आपकी असली क्यूट आवाज के साथ ही जाना चाहेंगे। इस तरह डोरेमोन को हिंदी में क्यूट आवाज मिली।

डोरेमोन की आवाज बनना कैसा था?

मैं 14 सालों तक डोरेमोन की आवाज रही हूं। डोरेमोन ने मुझे देश के बच्चों से जोड़ा है। आज भी जब में बच्चों से मिलती हूं तो वो मुझे डोरेमोन ही बुलाते हैं तो मुझे बहुत अच्छा लगता है।

भारत का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला कार्टून शो है डोरेमोन

डोरेमोन भारत का हाईएस्ट रेटेड किड्स शो रह चुका है, जिसके 480 मिलियन यानी 48 करोड़ व्यूअर्स हैं। इन व्यूअर्स में सिर्फ बच्चे ही नहीं बल्कि बड़े भी शामिल हैं।

1980 में आई थी डोरेमोन की पहली फिल्म

1980 में डोरेमोन की पहली फीचर फिल्म डोरेमोनः नोबिताज डायनासोर रिलीज हुई थी। तब से लेकर 2022 तक (2005 और 2021 को छोड़कर) हर साल डोरेमोन की एक फीचर फिल्म रिलीज होती है। फ्रेंचाइजी की आखिरी फिल्म डोरेमोनः नोबिताज लिटिल स्टार वॉर्स 2021, 4 मार्च 2022 को रिलीज हुई थी। महज तीन दिनों में इसकी 3.5 लाख और पहले वीकेंड इसकी 6.6 लाख टिकट बिकी थीं। इसने 171 करोड़ रुपए का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था।

डोरेमोन की 41 फिल्में रिलीज हो चुकी हैं, वहीं मार्च 2023 में इसकी अपकमिंग फिल्म डोरेमोन- नोबिटाज स्काय यूटोपिया रिलीज होने वाली है। फिल्म की 41 फ्रेंचाइजी फिल्मों का कुल कलेक्शन 13 हजार करोड़ है।

एक फिल्म की कमाई 1459 करोड़ रुपए

साल 2014 में रिलीज हुई फिल्म स्टैंड बाय मी डोरेमोन इस फ्रेंचाइजी की हाईएस्ट ग्रॉसिंग फिल्म है। इस फिल्म ने जापान में 479 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया था, जबकि इसका वर्ल्डवाइड कलेक्शन 1459 करोड़ रुपए था।

डोरेमोन का बच्चों पर बुरा असर पड़ने के डर से 2 देशों में लगा बैन

2016 में पाकिस्तान में डोरेमोन शो को बैन किए जाने की मांग उठी। उनका मानना था कि बच्चों पर इस शो का बुरा असर पड़ रहा है। 3 साल बाद इस शो को पाकिस्तान में बैन कर दिया गया। 2016 में ही कई कंपनियों के खिलाफ शिकायत करते हुए डोरेमोन और शिनचैन जैसे शोज बैन करने की मांग उठी थी, हालांकि भारत में इसे बैन नहीं किया गया। डिज्नी चैनल इंडिया को बांग्लादेश में भी बैन कर दिया गया है।

डोरेमोन के क्रेज का साइंस

डोरेमोन 25 देशों में देखा जा रहा है और सभी जगह ये सबसे फेवरेट कार्टून कैरेक्टर है। इसकी मेकिंग के दौरान ही उन बातों का ध्यान रखा गया जो इसका क्रेज बढ़ाता है।

1. डोरेमोन का शेप इतना आसान है कि बच्चों को जल्दी याद रह जाता है और वो इसे खुद भी डिजाइन कर सकते हैं।

2. डोरेमोन के पास कई सारे गैजेट्स हैं जो उसके दोस्त नोबिता की जिंदगी को आसान करते हैं। सारे बच्चे इस तरह के गैजेट्स के बारे में सोचते हैं। जैसे होमवर्क कर देने वाला गैजेट, मनचाहा खाना देने वाला गैजेट या एक जगह से दूसरी जगह आसानी से ले जाने वाला गैजेट।

3. डोरेमोन का बिहेवियर भी इसका क्रेज बढ़ने का एक कारण है। उसे इतना सीधा और समझदार बनाया गया है कि वो नोबिता की हर तरह से मदद तो करता है, लेकिन इसके मॉरल वैल्यूज भी सिखाता है।

4. नोबिता एक आलसी लड़का है, जिसके स्कूल में मार्क्स कम आते हैं और उसके दोस्त उसका मजाक उड़ाते हैं। कई बच्चे इस कहानी से काफी कनेक्ट करते हैं।

5. जापान में अनुशासन को काफी महत्व दिया जाता है, लेकिन नोबिता इसके उलट आलसी लड़का है। नोबिता को जापानी लोग ‘सिंबल ऑफ ट्रू फीलिंग’ कहते हैं, क्योंकि हर कोई उसकी तरह ही जीना चाहता है।

(source- Manga.tokya)

हैप्पी एंडिंग पर हुआ विवाद

राइटर फुजीको की मौत के बाद 1996 के बाद सीरीज को प्रसारित करने से रोक दिया गया। सीरीज को कन्क्लूजन तक पहुंचाने से पहले ही राइटर का निधन हो गया, जिससे व्यूअर्स काफी दुःखी थे। साल भर खूब विवाद भी हुए कि आखिर डोरेमोन का एंड क्या होगा?

कॉमिक कार्टूनिस्ट यासू टी ताजिमा ने इस सीरीज की एंडिंग बनाकर इंटरनेट पर 1998 में शेयर किया। इसकी कॉमिक 2005 में प्रकाशित हुई। कहानी के अनुसार, डोरेमोन की बैटरी डेड हो जाती है। नोबिता रोबोटिक इंजीनियर बनकर डोरेमोन को दोबारा बनाता है और खुशी-खुशी जीता है। बिना ऑफिशियल मेंबर्स की जानकारी के बिना ऐसी हैप्पी एंडिंग लिखने पर ताजिमा ने साल 2007 में माफीनामा जारी किया और फूजीको-प्रो से कॉमिक का प्रॉफिट शेयर किया।

कैसी होगी डोरेमोन की एंडिंग?

स्टैंड बाय मी डोरेमोन फिल्म के डायरेक्टर्स यूची यागी और ताकाशी यामाजाकी ने कन्फर्म किया है इसकी कई एंडिंग सोची गई हैं, लेकिन कुछ फाइनल नहीं हुआ। उनके अनुसार डोरेमोन की सिर्फ यही एंडिंग हो सकती है कि नोबिता और शिजूका की शादी हो जाए, जिससे डोरेमोन का मिशन पूरा हो और वो फ्यूचर में वापस लौट जाए।



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