46 साल के हुए कालीन भईया: सरकार के खिलाफ बोलने पर 7 दिन जेल में रहे, होटल में की कुक की नौकरी, गांव के नाटकों में निभाते थे लड़की का किरदार

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13 मिनट पहले

520 फिल्में, 65 टीवी शो, 7 वेब सीरीज, एक नेशनल अवॉर्ड और 18 सालों का एक्टिंग करियर। मिर्जापुर के कालीन भईया हो या सेक्रेड गेम्स के गुरुजी हर कैरेक्टर में जान डालने वाले पंकज त्रिपाठी अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं। पंकज त्रिपाठी के करियर की शुरुआत फिल्म रन से हुई थी। जिसके बाद बॉलीवुड को उन्होंने एक से बढ़कर एक फिल्में दीं। वो जब वेब सीरीज मिर्जापुर में कालीन भईया बने तो लोगों ने उन्हें कालीन भईया के नाम से ही जानना शुरु कर दिया। पंकज अपनी एक्टिंग से हर किरदार में जान डाल देते हैं।

पंकज का जन्म बिहार के बेलसंड गांव में हुआ था। अपने पिता की तरह पंकज भी शुरुआती दिनों में पंडिताई और किसानी किया करते थे। फिर जब गांव में होने वाले नाटकों में वो लड़की बनकर अपनी एक्टिंग का जलवा दिखाने लगे तो लोगों ने उन्हें एक्टर बनने की सलाह दी, पर उनके पिता उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते थे। इसलिए पिता ने उन्हें पढ़ाई पूरी करने के लिए पटना भेज दिया। वहां कॉलेज की पढ़ाई के दौरान पंकज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ गए। इस दौरान स्टेट गर्वमेंट के खिलाफ आवाज उठाने पर उन्हें 7 दिन जेल में बिताने पड़े।

जब कॉलेज की पढ़ाई पूरी हुई तब तक वो मनोज बाजपेयी को देखकर एक्टर बनने का सपना देख चुके थे लिहाजा उन्होंने एक्टिंग सीखना शुरू कर दिया और अपने खर्चों के लिए एक होटल में कुक बन गए। 2 साल वहां बिताने के बाद वो दिल्ली गए फिर मुंबई। तो चलिए आज इस बेहतरीन एक्टर के इस मुकाम तक पहुंचने के संघर्ष पर एक नजर डालते हैं।

पेड़ के नीचे बैठकर हुई स्कूली पढ़ाई

पंकज त्रिपाठी का जन्म 5 सितंबर 1976 को एक हिंदू ब्राह्मण फैमिली में बिहार के गांव बेलसंड में हुआ। उनके पिता किसानी का काम करते और गांव के मंदिर में पंडिताई भी। पंकज का जब जन्म हुआ तो उनके गांव में स्कूल और लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव था। इसलिए उनकी स्कूली पढ़ाई एक पेड़ के नीचे बैठकर ही पूरी हुई। पंकज के परिवार में उनके माता-पिता के अलावा 3 भाई बहन भी थे।

गांव के नाटकों में लड़की बनकर करते थे एक्टिंग

पंकज त्रिपाठी बचपन से ही खेती में अपने पिता का हाथ बंटाते और समय मिलने पर पंडिताई में भी उनकी मदद करने लगे। फिर जब वो 11वीं क्लॉस में आए तो उन्होंने गांव के नाटकों में लड़की बनकर एक्टिंग करना शुरू कर दिया। उनके एक्ट को गांव के लोग खासा पसंद करते थे और हंसी-मजाक में उन्हें बॉलीवुड जाने की सलाह भी दे दिया करते थे, पंकज का मन यहीं से एक्टिंग में लग गया। वो मनोज बाजपेयी के बहुत बड़े फैन थे और उनकी ही तरह एक्टर बनने का सपना भी देखा करते थे।

पिता ने डॉक्टर बनने के लिए भेजा घर से दूर

पंकज त्रिपाठी के पिता उन्हें डॉक्टर बनाना चाहते थे। लिहाजा जैसे ही उनकी स्कूली पढ़ाई पूरी हुई उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए पंकज को बाहर भेज दिया। इसके बाद पंकज हाजिपुर आए और इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट में एडमिशन ले लिया। हालांकि उनका लक्ष्य एक्टिंग में करियर बनाना ही था। यहां कॉलेज की पढ़ाई के दौरान वो थिएटर में भी एक्टिव रहने लगे।

सरकार के खिलाफ आवाज उठाने पर 7 दिन जेल में बिताए

कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही पंकज पॉलिटिक्स में भी काफी एक्टिव हो गए और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का हिस्सा बन गए। उस समय बिहार में लालू प्रसाद यादव की सरकार थी। 1993 का समय था, एक बार उन्होंने अपनी पार्टी के साथ मिलकर स्टेट गवर्मेंट के खिलाफ आवाज उठा दी। इसके बाद उन्हें 7 दिनों के लिए जेल जाना पड़ा था।

पढ़ाई के बाद होटल में की कुक की नौकरी

पंकज त्रिपाठी ने पढ़ाई के बाद पटना के एक होटल में कुक की नौकरी करना शुरू कर दिया था। इस दौरान वो थिएटर में भी एक्टिव रहे। यहां लगभग दो सालों तक नौकरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली का रुख कर लिया। दिल्ली में उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा ज्वाइन कर लिया।

दिल्ली से मुंबई का सफर

पंकज त्रिपाठी दिल्ली से एक्टिंग कोर्स करके मुंबई पहुंचे तो यहां भी उन्हें स्ट्रगल का सामना करना पड़ा। वो बिहार से थे और भोजपुरी ही उनकी भाषा थी। ऐसे में उन्हें हिंदी और इंग्लिश सीखने के लिए भी खासा स्ट्रगल करना पड़ा। इसके बाद 2004 में उन्हें फिल्म रन में एक छोटा सा रोल करने का मौका मिला। इस फिल्म में पंकज त्रिपाठी को देखकर शायद आप पहचान भी न पाएं। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में छोटे-मोटे रोल किए।

गैंग्स ऑफ वासेपुर से मिली पहचान

कई फिल्में करने के बाद भी पंकज त्रिपाठी को वो पहचान नहीं मिली थी जो उन्हें फिल्म गैंग्स ऑफ वासेपुर से मिली। इस फिल्म में उनका रोल काफी सराहा गया। इसके बाद ओटीटी पर रिलीज हुई मिर्जापुर ने उनके कालीन भईया के किरदार को यादगार बना दिया। पंकज अबतक 520 फिल्में, 65 टीवी शो और 7 वेब सीरीज में काम कर चुके हैं।

वैडिंग सेरेमनी में हुआ प्यार

17 साल के पंकज को एक वैडिंग सेरेमनी में मृदुला से प्यार हो गया था। इस लव स्टोरी को शादी तक पहुंचाने में परेशानी ये थी कि पंकज की बहन की शादी मृदुला के भाई से हुई थी, और उनके घर के ट्रेडिशन के हिसाब से उनकी शादी बहन की नंद से नहीं हो सकती थी। पंकज भी कहां मानने वाले थे वो तो मृदुला को अपना दिल दे ही बैठे थे। ऐसे में उन्हें अपने परिवार को मनाने के लिए कड़े जतन तो करने पड़े पर उन्होंने अपने परिवार को मना ही लिया। परिवार के राजी होने के बाद दोनों 15 जनवरी 2004 को शादी के बंधन में बंध गए। फिलहाल इस कपल की एक बेटी आशी है।

न्यूटन के लिए मिला नेशनल अवॉर्ड

पंकज त्रिपाठी ने अपने करियर में एक से बढ़कर एक रोल प्ले किए हैं। इसके लिए उन्हें कई अवॉर्ड्स से भी नवाजा गया है। फिल्म न्यूटन में उन्हें बेहतरीन एक्टिंग के लिए नेशनल अवॉर्ड, फिल्म लूडो के लिए इंटरनेशनल फिल्म एकेडमी अवॉर्ड और मिमी के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।

पहले स्टूडियो में नहीं घुसने दिया जाता था अब कई ऑफर्स

पंकज त्रिपाठी आज 46 साल के हो चुके हैं। उस समय के किस्से शेयर करते हुए वो बताते हैं जब वो मुंबई गए थे तो सिक्योरिटी गार्ड्स उन्हें स्टूडियो में नहीं घुसने देते थे, और प्रोड्यूसर्स उनसे बात भी नहीं करते थे। अब वही प्रोड्यू्सर्स उन्हें फिल्में ऑफर करते हैं। नेटवर्थ की बात करें तो वो 40 करोड़ रुपए के मालिक हैं। फिलहाल पंकज ओह माय गॉड-2 की शूटिंग में बिजी हैं।



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