हरजिंदर के घर खुशियों का माहौल: पिता साहिब सिंह ने कहा- इस मुकाम तक पहुंचा दिया, अब सरकार को उसका सोचना चाहिए

0
16
Advertisement


अमृतसर8 मिनट पहले

हरजिंदर कौर के घर पर परिवार खुशियों में झूमता हुआ।

पंजाब के नाभा में गांव मेहस के लोग मंगलवार सुबह से खुशियां माहौल बना हुआ है। उनके गांव की बेटी हरजिंदर कौर ने आज इंग्लैंड के बर्मिंघम में चल रही कॉमनवेल्थ गेम्स (CWG 2022) में ब्रोंज मेडल जीत लिया है। हरजिंदर ने 71 कि.ग्रा. भारवर्ग में 212 कि.ग्रा. भार उठाया। मेडल जीतने के बाद से ही गांव मेहस में साहिब सिंह के घर लोग बधाइयां देने पहुंच रहे हैं।

तीन कमरों का घर, जिसमें हरजिंदर पली-बढ़ी।

गांव मेहस में दाखिल होते ही ढोल की आवाज सुनाई देती है। पूरे गांव में खुशी का माहौल ऐसा है कि हरजिंदर का घर ढूंढने के लिए किसी को रास्ता पूछने की भी आज जरूरन नहीं थी। घर में दाखिल हुए तो सभी खुशी से झूम रहे थे। हरजिंदर के पिता साहिब सिंह हर आने वाले को बड़ी समाइल के साथ गले लगा रहे थे और शुभकामनाएं दे रहे थे। तीन कमरों के छोटे से घर में किसी बढ़े महल के बराबर खुशियां मनाई जा रही थी। माता-पिता, भाई-बहन सभी फ्रेम में जड़े मैडल लेकर खुशी से झूम रहे थे।

सरकार को अब अपना फर्ज निभाना होगा

पिता साहिब सिंह ने बताया कि उन्हें ही नहीं, पूरे गांव व देश को भी हरजिंदर की जीत की खुशी है। पिता ने बताया कि जब हरजिंदर ने खेलों को चुना तो परिवार के हालात अच्छे नहीं थे। लेकिन उनके किसी जानकार के कहने पर हरजिंदर खेलों में चली गई। कुछ जोर उन्होंने लगाया और कुछ मेहनत हरजिंदर की थी। लेकिन आज हरजिंदर की मेहनत सफल हो गई है। साहिब सिंह का कहना है कि हरजिंदर को इस मुकाम तक उन्होंने पहुंचा दिया है, अब सरकार का फर्ज बनता है कि उसे उसकी मेहनत का फल दिया जाए।

खेलों में प्रेरणास्रोत बनेगी हरजिंदर

पिता साहिब सिंह ने कहा कि खेलों में हरजिंदर हर किसी के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगी। आज के समय में खेलों में पंजाब के युवा आगे नहीं आ रहे। लेकिन जब युवाओं को अपना भविष्य खेलों में दिखेगा तो वे जरूर इस और झुकेंगे।

खेलों के साथ हमेशा पढ़ाई में भी होशियार रही

हरजिंदर की मां कुलदीप कौर भी इस दौरान भावुक हो गई। बेटी की जीत की खुशी में वह भी जमकर झूमी। कुलदीप कौर का कहना है कि उनकी बेटी होशियार है। खेलों के साथ-साथ पढ़ाई को उसने कभी प्रभावित नहीं होने दिया। इतना ही नहीं, घर के काम में वह हमेशा उनका हाथ बटाती थी। चूल्हा-चौका सब हरजिंदर संभाल लेती थी। वह चाहती है कि अब उनकी बेटी आगे-आगे बढ़ती जाए।



Source link

Advertisement