सिसकती पत्नी बोली-उनका क्या कसूर था… बेरहमी से मार डाला: सागर-भोपाल में सीरियल किलर ने उजाड़े 4 परिवार, घर में अब खाने के लाले

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सागर39 मिनट पहले

वो रोज ड्यूटी जाते थे। उनका क्या कसूर था कि उनकी हत्या कर दी। अब मेरे परिवार का कोई सहारा नहीं बचा है। मैं अकेली हो गई हूं। इतना बोलते ही फफक कर रोने लगती है। यह दर्द है चौकीदार कल्याण सिंह लोधी की पत्नी का। ऐसे ही सागर के सीरियल किलर ने सनक और फेमस होने के जुनून में चार परिवारों का घर उजाड़ दिया। तीन सागर में और एक भोपाल में। सभी चौकीदारों के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। किसी तरह चौकीदारी से मिलने वाले रुपयों से परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे, लेकिन कमाने वालों की मौत से इन परिवारों पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा है। मृतकों के परिवार के लोगों की एक ही मांग है कि आरोपी को सख्त सजा मिले। चारों चौकीदारों के परिवार के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। वे मदद की आस लगाए बैठे हैं। इन सभी परिवारों का दर्द एक जैसा है।

दैनिक भास्कर ने मृतकों के घर पहुंचकर उनके परिवार की स्थिति और दर्द को जाना, पढ़िए उन्हीं की जुबानी।

घर में खाने के लिए दाना नहीं बचा है, अब कोई सहारा नहीं
घर पर सन्नाटा है। चौखट पर कल्याण सिंह लोधी की पत्नी राधारानी लोधी बैठी हुई हैं। हिम्मत कर मैंने पूछा-कल्याण सिंह लोधी का घर यही है। बोलीं-हां भइया। सूखे गले से इतना बोलते ही उनकी आंखों में आंसू आ गए। मैंने परिचय दिया तो वो सिसकने लगीं। उनके बच्चे घर के अंदर से बाहर आ गए। बेटी मां की आंसू पोछते हुए रोने लगी। बेटा अलग ही भावुक होकर बैठ गया। यह मेरे लिए बहुत ही मुश्किल पल था। जैसे तैसे मैंने समझाया तो उन्होंने खुद को संभालते हुए मुझसे बात की। बताया कि 27 अगस्त दिन शनिवार की बात है। मेरे पति कल्याण सिंह लोधी कैंट थाना क्षेत्र के भैंसा में कारखाने में ड्यूटी कर रहे थे। रात में सीरियल किलर शिवप्रसाद आदिवासी ने सिर पर हथौड़ा मारकर हत्या कर दी थी। वो रोज 5 बजे ड्यूटी पर जाते थे। उनका क्या कसूर था कि उन्हें मार दिया। अब परिवार का कोई सहारा नहीं बचा है। अकेली बची हूं। मां को संभाल रहे बेटे संजय लोधी ने कहा कि पिताजी की मौत के बाद परिवार के सामने पालन-पोषण का संकट खड़ा हो गया। है। घर में एक बहन और छोटा भाई है। स्थिति यह है कि घर में खाने के लिए दाना नहीं बचा है। पिताजी को चौकीदारी से 4 हजार रुपए वेतन मिलता था। उसी से परिवार का खर्चा चलता था। प्रशासन से परिवार को अब तक कोई सहायता नहीं मिली है। बेटे संजय ने पिता को मारने वाले आरोपी को फांसी की सजा देने की मांग की है।

चौकीदार कल्याण लोधी की मौत से दुखी परिवार।

चौकीदार कल्याण लोधी की मौत से दुखी परिवार।

घर में बचे दो बच्चे और मां, परिवार चलाने वाला नहीं
कल्याण सिंह लोधी के घर के बाद मैं चौकीदार मंगल अहिरवार के घर पहुंचा। उनके दो बेटे और पत्नी घर के अंदर थे। परिवार से मिलने के लिए कहा तो बोले- उनकी पत्नी ऐसी स्थिति में नहीं है कि वो बात कर सके। छोटे भाई लक्ष्मण अहिरवार ने बताया कि बड़े भाई मंगल दिन में मजदूरी और रात में चौकीदारी का काम करते थे। दिन-रात मजदूरी करने के बाद उन्हें 600 रुपए दिन की मजदूरी मिलती थी। इसी पैसे से वे अपने परिवार का पेट भरते थे। घर में दो बेटे और पत्नी है। बेटे कुछ नहीं करते। मंगल की मौत के बाद परिवार के सामने पेट भरने का संकट खड़ा हो गया है। कमाने वाला कोई नहीं है। परिवार को मदद मिलना चाहिए। अब तक केवल आर्थिक सहायता का आश्वासन मिला है। आरोपी को पुलिस सख्त सजा दिलाए।

चौकीदार मंगल अहिरवार की मौत के बाद परिवार के सामने पालन-पोषण का संकट पैदा हो गया है

चौकीदार मंगल अहिरवार की मौत के बाद परिवार के सामने पालन-पोषण का संकट पैदा हो गया है

बेटा ने कहा- पिता की हत्या से परिवार हो गया बर्बाद
29 अगस्त की रात सिविल लाइन थाना क्षेत्र के आर्ट एण्ड कॉमर्स कॉलेज परिसर में चौकीदार शंभूदयाल दुबे (उम्र 60 साल), निवासी आनंद नगर मकरोनिया की सोते समय सिर पर पत्थर पटककर हत्या की गई थी। उनके घर पर पहुंचा तो शंभूदयाल के बेटे राहुल दुबे ने बताया- पिता करीब 6 वर्षों से कॉलेज में चौकीदारी कर रहे थे। वे रात करीब 9 बजे घर से जाते थे और सुबह आ जाते थे। ड्यूटी के दौरान ही उनकी हत्या कर दी गई। पिता की मौत से परिवार बर्बाद हो गया है। वे ही परिवार का पालन-पोषण करते थे। घर में दो भाई, एक बहन और मां हैं। बेटे राहुल ने कहा कि शासन परिवार की आर्थिक सहायता करे और आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलाए। पति शंभूदयाल की मौत के बाद पत्नी सदमे हैं। उनका रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के लोग उन्हें ढांढस बंधवा रहे हैं। लेकिन वह बदहवास हालत में हैं।

चौकीदार शंभूदयाल की मौत के बाद पत्नी सदमे में विलाप करती हुईं।

चौकीदार शंभूदयाल की मौत के बाद पत्नी सदमे में विलाप करती हुईं।

भोपाल के चौकीदार की कहानी…
सीरियल किलर ने गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात करीब 1.30 बजे खजूरी रोड स्थित गौरा मार्बल के गार्ड सोनू वर्मा की मार्बल के टुकड़ों से वार कर हत्या कर दी। सोनू की मौत के बाद उसकी मां और टीबी से पीड़ित बड़े भाई बेसहारा हो गए हैं। ऐसे में परिजन सरकार से हत्यारे को सख्त सजा देने और परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग कर कर रहे हैं। सोनू का परिवार मूल रूप से भिंड जिले का रहने वाला था। 2005 में उनका परिवार रोजगार के लिए भोपाल आकर बस गया। भोपाल आकर उसके पिता सुरेश वर्मा ने गौरा मार्बल में चौकीदार की नौकरी शुरू कर दी।

उनके चार बेटे और एक बेटी है। सोनू उनकी चौथे नंबर की संतान था। कुछ महीने पहले ही सोनू के पिता की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इसके बाद सोनू गौरा मार्बल में चौकीदारी करने लगा। 25 साल का सोनू 5वीं तक ही पढ़ा था। सोनू रात में चौकीदारी करता। वह शाम 7 बजे ड्यूटी पर आता और सुबह 7 बजे घर जाता था। 12 घंटे की ड्यूटी के बाद उसे महीने के 5000 रुपए मिलते थे। घर चलाने के लिए सोनू पानी सप्लाई करने वाले टैंकर पर पार्ट टाइम काम करता था। वहां काम करने के बाद उसे मुश्किल से 3-4 हजार रुपए मिलते थे। महीने में इस तरह दिन-रात काम करने के बाद भी वो मुश्किल से 8-9 हजार रुपए ही कमा पाता था।

4 भाइयों में एक विकलांग और एक पीड़ित
सोनू के तीन भाई और एक बहन थीं। बहन की टीबी की बीमारी के कारण मौत हो चुकी है। एक भाई अभी भी टीबी की बीमारी से जूझ रहा है। उसका इलाज भी सोनू ही करवा रहा था। सबसे बड़े भाई मंगल वर्मा पैर से विकलांग हैं। इनका पूरा परिवार सरकार द्वारा दिए गए दो कमरों के फ्लैट में रहता था। घर में जगह कम पड़ने पर सबसे बड़ा और सबसे छोटा भाई दूसरी जगह शिफ्ट हो गए थे। वे दोनों भाई भी छोटे-मोटे काम करके मुश्किल से घर चला रहे थे। ऐसे में मां और टीबी से बीमार भाई की जिम्मेदारी सोनू के कंधों पर ही थी।

रिमांड पर आरोपी, सिविल पुलिस कर रही पूछताछ
सीरियल किलिंग का आरोपी शिवप्रसाद आदिवासी उम्र 19 साल निवासी केकरा केसली पुलिस रिमांड पर है। पूछताछ में आरोपी शिवप्रसाद ने बताया कि वह कम समय में नाम और ज्यादा पैसा कमाना चाहता था।

जानिए सीरियल किलर के बारे में …
शिव गोंड उर्फ हल्कू। उम्र 19 साल। 8वीं तक पढ़ा है। गांव के उप सरपंच बसंत मेहर बताते हैं कि वह बचपन में लड़ाकू प्रवृत्ति का था। स्कूल में गांव के लड़कों को छोटी-छोटी बात पर पीट देता था। उसकी गांव में किसी से दोस्ती नहीं थी। सभी से झगड़ता रहता था। 6 साल पहले 13 साल की उम्र में घर से भागकर सागर आया। ट्रेन से पुणे पहुंचा। यहां होटल में नौकरी करने लगा। शिव बीच-बीच में एक-दो दिन के लिए गांव आता था। यहां किसी से मिलता-जुलता नहीं था। एक दिन होटल मालिक के साथ किसी बात को लेकर विवाद हो गया। शिव ने उसे इतना पीटा कि अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। शिव को बाल सुधार गृह भेज दिया गया। पिता नन्हे आदिवासी उसे छुड़ाकर लाए। इसके बाद वह गोवा चला गया। यहां वह काम करते-करते इंग्लिश बोलने-समझने लगा।

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