संवरेगा पाकिस्तान का 1200 साल पुराना वाल्मीकि मंदिर: 2 दशकों से ईसाई परिवार का कब्जा था, लंबी लड़ाई के बाद हुआ मुक्त

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एक घंटा पहले

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पाकिस्तान के लाहौर में 1200 साल पुराने वाल्मीकि मंदिर का नवीनीकरण किया जाएगा। इस मंदिर पर कई साल से एक ईसाई परिवार ने कब्जा कर रखा था। कोर्ट में लंबी लड़ाई के बाद जुलाई 2022 में संघीय निकाय इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) ने परिवार से मंदिर का कब्जा वापस ले लिया।

ETPB पाकिस्तान का एक संगठन है। यह देश के उन मंदिरों और भूमि की देखभाल करता है जिन्हें विभाजन के बाद सिख और हिंदू छोड़कर भारत चले गए थे। यह संगठन पूरे पाकिस्तान में 200 गुरुद्वारों और 150 मंदिरों की देखरेख करता है। बता दें कि लाहौर में लोग कृष्ण मंदिर के अलावा वाल्मीकि मंदिर में ही जाकर पूजा कर सकते है।

लाहौर में वाल्मीकि जाति के लोग ही वाल्मीकि मंदिर जाकर पूजा कर सकते है।

लाहौर में वाल्मीकि जाति के लोग ही वाल्मीकि मंदिर जाकर पूजा कर सकते है।

20 साल से मंदिर पर कब्जा था
मंदिर पर कब्जा करने वाले ईसाई परिवार का दावा है कि वे धर्म बदलकर हिंदू बन गए थे। इस परिवार का करीब 20 साल से मंदिर पर कब्जा था और वे केवल वाल्मीकि जाति के लोगों को ही मंदिर में पूजा करने देते थे।

ETBP के प्रवक्ता आमिर हाशमी ने कहा- मास्टर प्लान के तहत वाल्मीकि मंदिर को संवारा जाएगा। 100 से अधिक हिंदू, सिख और ईसाई नेता वाल्मीकि मंदिर पहुंचे। हिंदुओं ने मंदिर में पूजा पाठ किया और पहली बार लंगर में शामिल हुए।

गुस्साए लोगों ने वाल्मीकि मंदिर में मूर्तियां तोड़ी
ETBP के एक अधिकारी ने कहा मंदिर की जमीन राजस्व रिकॉर्ड में ETBP को दी गई थी लेकिन परिवार ने 2010-11 में संपत्ति के मालिक होने का दावा किया था और सिविल कोर्ट में मुकदमा दायर कर दिया था। 1992 में भारत में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बाद कुछ लोगों ने वाल्मीकि मंदिर पर हमला कर मूर्तियों को तोड़ दिया था और आसपास की बिल्डिगों में आग लगा दी थी।

ETBP के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने एक टीम गठित की थी जिसने सरकार को अपनी सिफारिशें पेश की थीं। जिसमें कहा गया था कि मंदिर का जीर्णोद्धार होना चाहिए लेकिन मामला कोर्ट में था, जिसकी वजह से ETBP मंदिर का जीर्णोद्धार नहीं कर सकती थी।

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