शालिनी चौधरी के आरोपों पर जीशान ने दिया जवाब: बोले- गाड़ी के सेल लेटर भी साइन किए थे; कहती थीं गाड़ी खरीदो या बिकवाओ

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मुंबई5 घंटे पहलेलेखक: अमित कर्ण

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गैंग्स ऑफ वासेपुर फेम जीशान सिद्दीकी इन दिनों प्रोड्यूसर शालिनी चौधरी के आरोपों से घिरे हुए हैं। शालिनी के साथ उन्होंने हलाहल नामक वेब सीरीज प्रोड्यूस की थी। शालिनी का आरोप है कि जीशान ने धोखे से उनकी ऑडी गाड़ी ली और चंडीगढ़ के एक निवासी के हाथों बेच दी। इस मामले में शालिनी ने मुंबई के मालाड स्टेशन में कंप्लेन भी की। अब इस पूरे मामले पर जीशान कादरी ने सफाई दी है। उन्होंने कहा- शालिनी ने गाड़ी के सेल लेटर भी साइन किए थे।

शालिनी ने कहा था गाड़ी बिकवाओ
जीशान कहते हैं, ‘शालिनी अपनी गाड़ी बिकवाना चाहती थी। इस इरादे से उन्होंने मुझे ऑडी A6 दी। मैंने कहा कि वह गाड़ी मुझे पसंद नहीं, उसे आप ले लो। शालिनी ने गाड़ी वापस लेने का आश्वासन दिया, मगर गाड़ी नहीं ली। शालिनी के पास और भी गाड़ियां हैं। उन्हें भी बिकवाने को वो मुझसे गुजारिश करती रहीं। इस पर मैंने अजीम नामक शख्स का नंबर उन्हें दिया। उनके जरिए दो गाड़ियां बिकीं भी। ऑडी A6 मेरे मत्थे ही वो मढ़ती रहीं कि आप ही उसे खरीदो या बिकवाओ।

हालांकि इसमें देरी होने लगी तो शालिनी जी का बिहेवियर रफ होने लगा। इस बीच मेरे एक दोस्त को ऑडी A6 पसंद आई। उस दोस्त ने शालिनी को दो चेक दिए। एक चेक छह लाख की रकम वाला सेल्फ चेक था। दूसरा चेक 13 लाख की रकम का था। दोनों चेक राजबाला चौधरी के नाम पर था। वह इसलिए कि गाड़ी से संबंधित जो सेल लेटर, आधार कार्ड आदि थे, वो राजबाला चौधरी के नाम से था। गाड़ी की रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट पर भी नाम राजबाला चौधरी का था।

सेल्फ चेक क्लियर नहीं हुआ
जीशान आगे कहते हैं, ‘शालिनी ने उस नाम के चेक एक्सेप्ट किए। गाड़ी के सेल लेटर भी साइन किए। आगे उनके बेटे का कॉल आया। यह कहते हुए कि जो छह लाख का सेल्फ चेक था, वह क्लियर नहीं हो रहा, क्योंकि बैंक उसे जारी करने वाले की मौजूदगी अपने सामने चाहता है। सेल्फ चेक पिछले साल 9 नवंबर का था। बैंक के ऑब्जेक्शन पर पिछले साल 11 और 12 नवंबर को शालिनी को पांच लाख पचहत्तर हजार रुपए की रकम ट्रांसफर कर दी गई। शालिनी से कहा गया कि वो वह सेल्फ चेक वापस लेकर आएं और बाकी 25 हजार की रकम ले लें। पर उनके बेटे ने न वह सेल्फ चेक वापस किया और न आगे से कॉल्स और मेसेजेज का जवाब ही दिया।’

हलाहल के लिए नो प्रॉफिट नो लॉस पर बात हुई थी
दूसरे चेक के बारे में जीशान ने कहा, वो चेक 13 लाख का बियरर चेक था। शालिनी ने वह चेक कभी बैंक में जमा किया ही नहीं और तर्क दिया कि उनके उस अकाउंट में पैसे नहीं थे। ऐसे में, चेक लेकर वहां नहीं गई। चेक बाउंस होता तो तब केस करतीं। वह सब करने के बजाय शालिनी 8 जनवरी को इस साल मालाड पुलिस थाने चली गईं। वहां के IO यानी जांच अधिकारी के सामने कंप्लेन दर्ज किया कि मैंने चुपके से उनकी गाड़ी ली है। फिर 9 जनवरी को मुझे कॉल आया कि अपना स्टेटमेंट दें। चूंकि उस समय मुझे माइल्ड कोविड था। ऐसे में मैंने स्टेटमेंट देने के लिए वक्त मांगा। आखिरकार 23 जनवरी को मेरी मालाड थाने के IO सुनील से बात हुई कि मुझे अब कब आना है? उन्होंने 25 जनवरी का वक्त मुझे दिया।

थाने जाने से पहले ही यानी 24 जनवरी को मैं ओशिवारा थाने के एरौमा कैफ में मैं मीटिंग कर रहा था। वहां शालिनी चौधरी अपने दो बेटों, भाई लोकेश और एक और इंसान के साथ आती है और मुझे लिटरली किडनैप कर उठा ले जाती हैं। इनके पास काले शीशे वाली फॉर्चुनर थी। उसमें यह मुझे लेकर लोखंडवाला के लव एंड लाटे रेस्टोरेंट पर ले जाते हैं। वहां मुझे एसॉल्ट करते हैं। उसके बाद ये मुझे मेरे ही घर ले आते हैं। अब वहां कहते हैं कि अब मुझे 26 लाख की रकम चाहिए। 13 लाख रुपए गाड़ी और बाकी 10 लाख रुपए हलाहल के। जबकि हलाहल हम दोनों के बीच नो प्रॉफिट नो लॉस पर बात हुई थी। बहरहाल, यह सब उन्होंने मुझसे ऑन कैमरा बोल उसे रिकॉर्ड कर लिया।

11 फरवरी को शालिनी ने उठा लिया था
पर यहां उन लोगों से एक भूल हुई। वह यह कि वो जब यह सब ऑन कैमरा रिकॉर्ड कर रहे थे तो उन्हें यह नहीं पता था कि मेरे कमरे में सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है। वह सब वाकया मेरे सीसीटीवी कैमरा में रिकॉर्ड हो गया। दूसरी भूल उनकी यह रही कि जब उन्होंने मुझे एरोमा से उठाया और लव एंड लाटे रेस्टोरेंट लेकर लाया तो वहीं से मालाड पुलिस थाने के IO सुनील को कॉल कर कहा कि जीशान को उठा लिया है। बताएं कहां लाना है, सुनील ने उन्हें कहा कि ऐसा नहीं होता। जीशान तो ऑलरेडी 25 जनवरी को थाने आने वाला है।

जीशान बताया, मैं तय समय पर वहां गया, सारे प्रूफ दिए। सुनील ने फिर शालिनी को कॉल किया और कहा कि पुलिस को गुमराह कर रही हैं। पैसे का मैटर है तो कोर्ट जाएं। यह कहकर उन्होंने केस क्लोज कर दिया। मैं ट्रॉमा में था। मैंने 11 फरवरी को जहां से मैं उठाया गया था, वहां मैंने ओशिवारा थाने से लेकर एसीपी, डीसीपी सब को कंप्लेन भेजी। वहां जांच अधिकारी अमर पाटिल के सामने मैंने अपने स्टेटमेंट दर्ज करवाए। शालिनी से कहा गया कि वो भी आकर अपनी स्टेटमेंट दर्ज करें। पर वह कभी आई नहीं।

एक ही थाने में दो कंप्लेन
इस पर मुझसे पूछा भी गया कि कंप्लेन को FIR में कन्वर्ट करवा लो। इस पर मैंने दया दिखाते हुए सोचा कि वो है सिंगल लेडी, दो बच्चे हैं। जेल वेल चली जाएगी। इस बीच अमर पाटिल का ट्रांसफर हो गया। अब फिर से जुलाई के महीने में मुझे मालाड थाने से कॉल आया कि आप के खिलाफ तो एक और कंप्लेन है कि मैंने धोखे से गाड़ी ली। फर्जी दस्तावेज से गाड़ी बेच ली। कंप्लेन सिर्फ मेरे ऊपर ही नहीं, जनवरी में जो IO सुनील थे, उनके ऊपर भी है। यह बड़ी अजीब बात थी कि एक ही मामले में सेम थाने में दो अलग कंप्लेन थे। मैं जुलाई में गोवा में था। मेरे बिहाफ पर मेरे लॉयर वहां गए।

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