विल पावर और आदतों में संबंध पर शोध: आदतें इच्छाशक्ति से ज्यादा शक्तिशाली होती हैं; पहले लक्ष्य तय करें, फिर आदतें

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5 घंटे पहले

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कहते हैं आदतें बदली जा सकती हैं, लेकिन ये इतना आसान नहीं है। थोड़े समय के लिए अपनी किसी आदत को छोड़ देना जैसे कि चाय या कॉफी पीने की आदत। ये ज्यादा मुश्किल नहीं है, लेकिन क्या आप हफ्तों-महीनों या सालों तक ऐसा कर सकते हैं। आपकी इच्छाशक्ति चाहे जितनी मजबूत हो, जैसे-जैसे समय गुजरता जाता है, आपकी आदत हावी होने लगती है और फिर चाय या काफी की तलब लगने लगती है।

यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिलवेनिया के शोधकर्ता असफ मजर ने इंसान की इच्छाशक्ति और आदतों के बीच के संबंध पर शोध किया है। वे कहते हैं आदतें हमारे व्यक्तित्व का हिस्सा होती हैं। वे हमारा व्यक्तित्व एक जैसा बनाए रखती हैं, लेकिन इच्छाशक्ति बड़े बदलाव की चाहत है। इसके लिए आदतों पर काबू पाना जरूरी है। उनके शोध से पता चला कि चाय या कॉफी के लती को ही थकने पर चाय की जरूरत महसूस होती है। उसे लगता है कि थकान की वजह से चाय-कॉफी की तलब लगी है, लेकिन वास्तव में ये उसकी आदत है, जो थकान की वजह से शरीर के कमजोर होने पर हावी हो जाती है।

आदतों का सीधा संबंध हमारी इच्छाशक्ति से
शिकागो की यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस के इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ रिसर्च एंड पॉलिसी के शोधों से ये पता चला है कि दुकानों में सिगरेट के पैकेट कम दिखने पर उसकी बिक्री भी कम हुई। जाहिर सी बात है लोगों को कम तलब हुई। आदतों का सीधा संबंध हमारी इच्छाशक्ति से है। किसी भी आदत को बदलने के लिए इच्छाशक्ति जरूरी है और यह हमेशा बनी रहनी चाहिए।

आपने सालों शराब छोड़ने के बाद लोगों को दोबारा शराब पीते देखा होगा। ये उनकी इच्छाशक्ति के कमजोर होने की वजह से होता है। दुनिया में किसी भी और समूह से ज्यादा अमेरिकी कहते हैं कि उनकी सफलता उनकी मुट्‌ठी में है। ये बात इच्छाशक्ति से ज्यादा आदतों की मोहताज होती है। शोधकर्ता असफ मजर कहते हैं आप जैसा बनना चाहते हैं, वैसी आदत अपनाएं, इच्छाशक्ति के कमजोर होने पर भी लक्ष्य नहीं चूकेंगे।

आदतें जीवन का हिस्सा
बिहेवियरल साइंटिस्ट कहते हैं, आदतों की वजह से इंसान रोज अपना व्यवहार दोहराता है और उसे पता भी नहीं चलता। बचपन में पड़ी आदतें जीवन का हिस्सा बन जाती हैं। मां-बाप की परवरिश के दौरान आदतों को बदलना बहुत मुश्किल होता है। बचपन की आदतों से हमारा स्वभाव भी तय होता है।

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