लोकेशन बता कंपनियां करोड़ों कमा रहीं: आप कहां जा रहे, किससे मिल रहे जैसी सूचनाएं बेचना अब 95 हजार करोड़ रुपए का कारोबार

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वॉशिंगटन2 घंटे पहले

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क्या आप जानते हैं, पता बताने के पैसे मिलते हैं। आप कब कहां हैं ये बताकर कई कंपनियां करोड़ों रुपए कमा रही हैं। दुनियाभर में पता बताने का ये बाजार 95 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का हो गया है। ये सबकुछ होता है आपके फोन से। आपके फोन में इंस्टॉल तमाम एप्स आपकी लोकेशन ट्रैक करते रहते हैं। इंस्टॉल करते वक्त ही ये इसकी इजाजत ले लेते हैं। मौसम, फूड डिलीवरी, डेटिंग, गेमिंग जैसे ऐप्स के जरिए ये ज्यादा होते हैं। कई ऐप्स चुपके से आपका लोकेशन ट्रैक करते हैं।

2018 में न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सिर्फ अमेरिका में ही एप्स के जरिए 20 करोड़ मोबाइल की लोकेशन ट्रैक की जा रही थी। यहां तक कि कई बार एक दिन में ही 14 हजार बार तक मोबाइल लोकेशन भेजा गया था। इससे लोगों की निजता खतरे में पड़ गई है।

प्राइवेसी खतरे में
निजता विशेषज्ञ और वकील नाथन वेसलर कहते हैं, लोकेशन ट्रैक करने से आपके सोने से जागने तक की सारी जानकारी किसी और के पास पहुंच जाती है। आप किससे मिल रहे हैं, किसके साथ घूम-फिर रहे हैं, कहां आ-जा रहे हैं। सब कुछ का डाटा है। इस तरह की जानकारियों से आपकी प्राइवेसी खतरे में पड़ जाती है। ये मामले लगातार बढ़ रहे हैं। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस सेलफोन ट्रैकिंग टूल का इस्तेमाल कर रही है। पकड़े जाने पर कंपनियां इसके लिए पछतावा जता देती हैं, लेकिन डाटा इकट्‌ठा करती रहती हैं।

फेसबुक ने गलती नहीं मानी
फेसबुक की मेटा ने लोकेशन बंद करने के बावजूद लोकेशन ट्रैक करने पर कोर्ट के आदेश पर 7 करोड़ उपयोगकर्ताओं को 300 करोड़ रुपए का हर्जाना दिया, लेकिन अपनी गलती नहीं मानी। कनाडा में कॉफी चेन टीम हॉर्टन ने एप का इस्तेमाल करने वालों का लोकेशन ट्रैक करने पर माफी मांगी।

शोधकर्ताओं ने पाया है कि एक औसत कामकाज करने वाले इंसान के मोबाइल में 25 के आसपास एप्स होते हैं। जबकि लोकेशन ट्रैक करने वाले एप्स हजारों में है। 2020 में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, फेडरल एजेंसी ने मुस्लिम प्रेयर और कुरान जैसी एप्स के जरिए लोकेशन डाटा इकट्ठा किया। एक कैथोलिक प्रीस्ट को इसलिए निकाल दिया गया, क्योंकि उसकी लोकेशन गे बार के पास मिली थी।

लोकेशन डाटा से कमाई, सर्च हिस्ट्री और लाइक्स का डाटा भी बिकता है
एप्स के जरिए कंपनियां ये डाटा इकट्‌ठा करके ब्रोकर्स, एग्रीगेटर्स और कानूनी एजेंसियों को बेच देती हैं। विज्ञापन कंपनियां इनसे जुड़ी होती हैं। ये सोशल मीडिया लाइक्स और सर्च हिस्ट्री को लोकेशन से मैच करके ऐड देना शुरू कर देती हैं। ऐड कंपनियों को अपने क्लाइंट से इस तरह के टार्गेटेड ऐड के लिए कहीं ज्यादा भुगतान किया जाता है।

गूगल और फेसबुक जैसी कंपनियों से हर साल लाखों इस्तेमालकर्ताओं की सूचनाएं मांगी जाती हैं और 90% मामलों में सूचनाएं दे भी दी जाती हैं, उनके लोकेशन के अलावा उनकी सर्च हिस्ट्री, लाइक्स, कमेंट, खरीदारी आदि। इसलिए लोकेशन ऑफ रखें।

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