लिज को पड़ेगी सुनक की जरूरत: फौरन टैक्स रिलीफ का वादा पूरा करना मुश्किल, पार्टी सांसदों की पहली पसंद थे ऋषि

0
25


लंदन/वॉशिंगटन2 घंटे पहले

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री चुनाव में सत्तारूढ़ कंजर्वेटिव के सांसदों की पहली पसंद भारतीय मूल के ऋषि सुनक ही थे। पांचों राउंड की वोटिंग में सुनक हर बार बड़े अंतर से जीते। आखिरी फैसला पार्टी के 1.60 लाख मेंबर्स ने किया। इनकी पसंद लिज ट्रस रहीं। जीत के बाद अगर लिज की पहली स्पीच को गौर से सुना जाए तो यह साफ हो जाता है कि ट्रेड और इकोनॉमी के मास्टर कहे जाने वाले ऋषि की फायरब्रांड लिज को कितनी जरूरत होगी।

लिज ने साफ तौर पर कहा कि उन्हें ऋषि की गहरी समझ की जरूरत होगी। उन्होंने पार्टी में सुनक जैसे नेता के होने को खुशकिस्मती करार दिया। अब ब्रिटिश मीडिया के कुछ हिस्से सवाल उठा रहे हैं कि क्या लिज फौरन टैक्स रिलीफ जैसे चुनावी वादे पूरा कर पाएंगी, या अगला चुनाव जल्द होगा।

सोमवार को जीत के बाद कंजर्वेटिव पार्टी के हेडक्वॉर्टर पहुंचीं लिज ट्रस सांसदों के साथ।

सुनक ज्यादा प्रैक्टिकल रहे

  • 8 हफ्ते चले इलेक्शन कैम्पेन में लिज ट्रस ने सुनक की काट बड़ी मुश्किल से खोजी। ‘द गार्डियन’ की रिपोर्ट के मुताबिक- सुनक फाइनेंस मिनिस्टर रहे। वो इकोनॉमी की बारीकियों को बहुत बेहतर तरीके से समझते थे। उन्होंने पूरे कैम्पेन के दौरान कहा- टैक्स में कमी करने से इकोनॉमी और लोगों के हालत बेहतर नहीं होंगे। इसके लिए दूसरे तरीकों से महंगाई पहले कम करनी होगी।
  • दूसरी तरफ, ट्रस एक तरह से लोकलुभावन वादे करने लगीं। उन्होंने कहा- मैं प्रधानमंत्री बनी तो सबसे पहले टैक्स रिलीफ दिया जाएगा। महंगाई और गैस शॉर्टेज जैसे मुद्दों पर काम बाद में किया जा सकता है। सुनक ने इस इकोनॉमिक प्लान का सख्त विरोध किया। कहा- ये तो इकोनॉमी को तबाह करने का रास्ता होगा।
  • ‘द गार्डियन’ लिखता है- सुनक बीमारी का स्थायी इलाज खोजने की बात कर रहे थे। लिज ने कुछ वक्त तक इसे काबू में रखने की बात कही। सवाल यही है कि क्या लिज फौरन टैक्स रिलीफ का वादा पूरा कर पाएंगी।

लीडरशिप की रेस में सुनक का दावा मजबूत
BBC की एक रिपोर्ट के मुताबिक- लिज के लिए रास्ता बहुत मुश्किल है। हालांकि, उनके लिए राहत की बात सुनक का बयान है। उन्होंने लिज को बतौर सांसद पूरी मदद का भरोसा दिलाया है। सुनक अगले चुनाव में पार्टी लीडरशिप की रेस में बने रहेंगे। उन्होंने कहा- मैं कंजर्वेटिव पार्टी का सांसद हूं। हमारी सरकार है। सांसद या किसी और तरीके से ही सही, मैं अपनी सरकार की मदद करूंगा।

खास बात यह है कि सुनक ने कैम्पेन खत्म होने के बाद लिज के चुनावी वादों पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। इसका मतलब साफ है कि वो नई सरकार और प्रधानमंत्री को किसी मुश्किल में नहीं डालना चाहते।

कमजोर PM साबित होंगी लिज

  • ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ ने लिखा- हैरानी की बात है कि कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद लिज के फेवर में नहीं थे। सर्वे में हिस्सा लेने वाले गैर कंजर्वेटिव लोग कह रहे थे कि लिज सबसे कमजोर प्रधानमंत्री साबित होंगी। इसके बावजूद वो जीत गईं।
  • इसी रिपोर्ट में सुनक के लिए लिखा गया- ऋषि पार्टी सांसदों की पहली पसंद थे। हर सांसद उनकी काबिलियत से वाकिफ था। इसके बावजूद सुनक महंगाई कम करने और टैक्स रिलीफ के मुद्दों पर अपने स्टैंड से पीछे नहीं हटे। ये समझदार नेता की पहचान है।
  • वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक- पार्टी मेंबर्स को लगता रहा कि जॉनसन को हटाने के लिए सुनक ही जिम्मेदार हैं। उन्हें धोखेबाज और भरोसा तोड़ने वाला करार दिया गया। लिज ट्रस पाला बदलने में माहिर हैं। उन्होंने अब भी यही किया। चूंकि यह जनरल इलेक्शन नहीं था, सिर्फ कंजर्वेटिव पार्टी (ब्रिटेन की कुल आबादी का महज (0.25%) का अंदरूनी मसला था। लिहाजा, लिज जीत गईं।

विचारधारा बदलने में माहिर हैं लिज

  • ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ की ही रिपोर्ट के मुताबिक- लिज ट्रस राय या विचारधारा बदलने में माहिर हैं। इसकी कई मिसालें मौजूद हैं। पॉलिटिकल कॅरियर की शुरूआत में वो लिबरल डेमोक्रेट थीं। इसके बाद उन्हें मौका नजर आया तो कंजर्वेटिव हो गईं।
  • कॉलेज के दौर में लिज मोनार्की यानी राजशाही की सख्त खिलाफत करती थीं। उनके भाषण अब तक मौजूद हैं। वक्त बदला तो बकिंघम पैलेस और शाही खानदान के पक्ष में बोलने लगीं। अब क्वीन के हाथों ही शपथ भी लेंगी।
  • बोरिस जॉनसन के दौर में ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन यानी EU से बाहर निकलने (ब्रेक्जिट) का मुद्दा उठा। इस पर ही पिछला चुनाव लड़ा गया। मजे की बात यह है कि कभी EU में रहने की वकालत करने वाली लिज ब्रेक्जिट का समर्थन करने वाली बन गईं।
  • इसी रिपोर्ट में आगे कहा गया- सच सिर्फ यह है कि लिज को कुर्सी संभालने के बाद ‘हनीमून पीरिएड’ नहीं मिलेगा। वादे के मुताबिक, फौरन टैक्स रिलीफ और एनर्जी बिल्स में राहत देनी होगी। इकोनॉमी बैलेंस करनी होगी, वरना ब्रिटेन मंदी की चपेट में किसी भी वक्त चला जाएगा।



Source link