रूस को हथियार भेज रहा साउथ कोरिया: US का आरोप- मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका के रास्ते पहुंचाया जा रहा गोला-बारूद

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कीव/मॉस्को21 मिनट पहले

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अमेरिका ने साउथ कोरिया पर रूस को सीक्रेट तरीके से हथियार सप्लाई करने का आरोप लगाया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यूक्रेन से साथ जंग में साउथ कोरिया रूस की मदद कर रहा है। मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका के रास्ते हथियार रूस पहुंचाए जा रहे हैं।

अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के प्रवक्ता जॉन कर्बी ने कहा- हमारी जानकारी के मुताबिक, मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका के रास्ते हथियार सीक्रेट तरीके से रूस पहुंचाए जा रहे हैं। सितंबर में खबरें थीं कि रूस साउथ कोरिया से हथियार खरीदने के बारे में सोच सहा है। फिलहाल हथियार रूस पहुंचे हैं या नहीं, कंफर्म नहीं है। हम इसकी जांच कर रहे हैं।

ईरान ड्रोन भेज रहा
जॉन कर्बी ने कहा- अमेरिका इस बात से भी चिंतित है कि ईरान ड्रोन और मिसाइलों रूस को भेज रहा है। जंग के 8 महीने बाद रूस ने यूक्रेन पर ईरानी हथिहारों से हमला करना शुरू कर दिया। ईरानी सैनिकों को रूसी बलों की मदद के लिए क्रीमिया भेजा गया। वो रूसी सैनिकों को ड्रोन चलाना सिखा रहे हैं।

अमेरिका को चिंता क्यों
दरअसल, रूस जंग में यूक्रेन पर ईरान कामीकाजे ड्रोन से हमला कर रहा है। अमेरिकी सैनिकों पर भी इस ड्रोन से हमला हो चुका है। अमेरिकी सेना के मुताबिक, ईरानी समर्थित मिलिशिया ने इस साल इराक में अमेरिकी ठिकानों पर 10 हमलों में ऐसे छोटे ड्रोन का इस्तेमाल किया है।

यूक्रेन को एटमी हथियार बनाने में मदद कर रहा पाकिस्तान

रूस ने दावा किया है कि पाकिस्तान परमाणु हथियार बनाने में यूक्रेन की मदद कर रहा है। रूस के सांसद इगोर मोरोजोव का कहना है कि यूक्रेन की सेना को पाकिस्तान तोप के गोलों की सप्लाई कर रहा है। इससे पहले पाकिस्तान पर तानाशाही देश नॉर्थ कोरिया और लीबिया को परमाणु बम बनाने की तकनीक बेचने के आरोप लगे थे। रूस ने यह भी दावा किया है कि परमाणु बम की समझ रखने वाले यूक्रेन के लोगों ने पाकिस्तान का दौरा किया है।

रूस UN समझौते में फिर शामिल
रूस ने यूनाइटेड नेशन ग्रेन डील में फिर शामिल होने का ऐलान किया है। अब यूक्रेन काले सागर से होकर गेहूं का परिवहन कर सकेगा। रूस ने यूक्रेनी हमलों के विरोध में गेहूं परिवहन समझौते को छोड़ने की घोषणा की थी। रूस ने चेताया था कि यूक्रेन से गेहूं का परिवहन करने वाले जहाजों को अपने जोखिम पर काला सागर पार करना होगा। बताया जा रहा है कि तुर्की की मध्यस्थता के बाद रूस गेहूं परिवहन समझौते में शामिल होने पर राजी हुआ है।

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