रूपा तिर्की कॉमनवेल्थ के लिए शादी बाद कैंप आ गईं: लोगों ने कसा तंज-लॉन बॉल्स कौन सा खेल, पति बोले-मौका मत गंवाओ; देश को दिलाया गोल्ड

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नई दिल्ली26 मिनट पहलेलेखक: संजय सिन्हा

कॉमनवेल्थ गेम्स में लॉन बॉल में भारत को गोल्ड मेडल दिलाने वाली स्टार प्लेयर रूपा रानी तिर्की झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली हैं। जिस देश में क्रिकेट की पहुंच शहर और गांव-गांव तक हो, वहां लॉन बॉल के बारे में बहुत कम लोगों को ही पता है। कई तो इसे खेल के रूप में भी नहीं लेते।

बर्मिंघम कॉमनवेल्थ में जब भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड को हराया और फाइनल में पहुंची तब इस खेल के बारे में लोग जान सके। यहां तक कि टीम को पहुंचने में रूपा रानी तिर्की की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। रूपा ने बर्मिंघम से भास्कर वुमन से बात की। ये मैं हूं में आज रूपा रानी तिर्की की कहानी जानते हैं उन्हीं की जुबानी।

खेल पदाधिकारी के पद पर हैं रूपा रानी तिर्की

मेरा जन्म रांची में हुआ। रांची के राजा बंगला कंपाउंड सुजाता चौक में मेरा घर है। अभी झारखंड के ही रामगढ़ जिले में जिला खेल पदाधिकारी के रूप में पोस्टेड हूं। इसके पहले चाईबासा में इसी पद पर थी। चार महीने पहले जब मैं नेशनल कैंप में दिल्ली आई तभी मेरा ट्रांसफर किया गया। अभी मैंने वहां ज्वॉइन भी नहीं किया है।

बर्मिंघम में जीत के बाद विजयी मुद्रा में रूपा रानी तिर्की।

बड़ी बहन को क्रिकेट से है प्यार

पापा पोस्ट ऑफिस में नौकरी करते थे। 2007 में उनका निधन हो गया। इसके बाद मम्मी ने डोरंडा पोस्ट ऑफिस में नौकरी की। वो भी रिटायर हो गई हैं। एक बड़ी और एक छोटी बहन है। बड़ी बहन रीमा रानी तिर्की बिशप स्कूल में स्पोर्ट्स टीचर हैं। वह क्रिकेट खेलती है। जबकि छोटी बहन ने एमबीए किया है। अभी वह कॉम्पिटिशन की तैयारी कर रही है।

रूपा रानी 20 जुलाई को बर्मिंघम गईं थीं। लंदन में टेम्स नदी के किनारे उनकी तस्वीर।

रूपा रानी 20 जुलाई को बर्मिंघम गईं थीं। लंदन में टेम्स नदी के किनारे उनकी तस्वीर।

रांची विश्वविद्यालय के गोस्सनर कॉलेज से की पढ़ाई

मैंने संत अन्ना स्कूल रांची से पढ़ाई की। आगे गोस्सनर कॉलेज से पढ़ाई की। खेल के साथ पढ़ाई भी जारी रही। मैंने इतिहास विषय से ग्रेजुएशन किया। अक्टूबर 2020 में मुरी नौकरी मिली।

नेशनल लेवल पर कबड्डी खेली

लॉन बॉल में आने से पहले मैंने राष्ट्रीय स्तर पर कबड्डी खेली। बास्केटबॉल भी खेला। इसी दौरान एक शुभचिंतक ने मुझे लॉन बॉल के बारे में बताया। तब मैं इस खेल के बारे में नहीं जानती थी। मैंने जब खेलना शुरू किया तो मुझे अच्छा लगा।

लोग बोले- ये कौन सा खेल है

जब मैंने तय किया कि मैं लॉन बॉल में जाऊंगी, तब कई लोगों ने कहा कि ये कौन सा खेल है। इसमें कोई फ्यूचर नहीं है। घर परिवार के ही लोगों ने कहा कि दूसरे गेम में जाना चाहिए। लेकिन मुझे लगा कि नहीं, मेरा भविष्य इसी खेल में है।

रांची के गोस्सनर कॉलेज के छात्रों ने रूपा रानी तिर्की को उनकी शानदार जीत के लिए बधाई दी है। रूपा ने गोस्सनर से ही पढ़ाई की है।

रांची के गोस्सनर कॉलेज के छात्रों ने रूपा रानी तिर्की को उनकी शानदार जीत के लिए बधाई दी है। रूपा ने गोस्सनर से ही पढ़ाई की है।

गुवाहाटी में नेशनल कैंप में हुआ सेलेक्शन

फरवरी 2007 की बात है। गुवाहाटी में ऑस्ट्रेलिया के कोच आए हुए थे। 10 दिनों का कैंप लगा था। वहां मेरा सेलेक्शन हो गया। इसके बाद प्रैक्टिस करने लगी। तब झारखंड के खेल मंत्री ने भी मुझे काफी प्रोत्साहित किया। दो साल बाद यानी 2009 में ऑस्ट्रेलिया में जूनियर वर्ल्ड कप खेला। इसी साल चीन में हुई एशियन चैंपियनशिप में हमने गोल्ड मेडल हासिल किया।

ट्रेनिंग के लिए न्यूजीलैंड ओर आस्ट्रेलिया में रही

अगले ही साल 2010 में दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स होने थे। कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए इंडियन टीम बनानी थी। तब ऑस्ट्रेलिया के कोच रिचर्ड गेर ने ट्रेनिंग देना शुरू किया। 40-40 दिन के दो ट्रेनिंग कैंप के लिए न्यूजीलैंड और मलेशिया में रही। इस ट्रेनिंग का ही असर रहा कि इंडियन टीम सेमीफाइनल तक पहुंच सकी। इसके बाद लगातार खेल चलता रहा।

जीत के बाद विक्ट्री सिंबल दिखाते खिलाड़ी। रूपा रानी तस्वीर में दाएं से क्रम में तीसरे।

जीत के बाद विक्ट्री सिंबल दिखाते खिलाड़ी। रूपा रानी तस्वीर में दाएं से क्रम में तीसरे।

शादी के एक महीने बाद ही कैंप में आ गई

इसी साल जनवरी में मेरी शादी हुई। मेरे पति अमृत मिंज इंजीनियर हैं। शादी के एक महीने बाद ही मुझे दिल्ली में नेशनल कैंप के लिए जाना था। मैंने थोड़ा संकोच किया। पति से कहा भी कि अभी-अभी शादी हुई है। कैंप के लिए कैसे जाएं। इस पर अमृत ने प्रोमोट किया। उन्होंने कहा कि जाओ जमकर अपना गेम खेलो। उनके सपोर्ट से ही मैं नेशनल कैंप आ सकी। दिल्ली में चार महीने नेशनल कैंप में रही। 20 जुलाई को हम बर्मिंघम के लिए रवाना हुए थे।

खिलाड़ियों को लगातार मोटिवेट करती रही

साउथ अफ्रीका को हराना आसान नहीं था। वो वर्ल्ड चैंपियन रहे थे। कई कॉमनवेल्थ में वो विजेता रहे थे। लेकिन हमने सही रणनीति अपनायी। खिलाड़ियों को लगातार मोटिवेट करती रही। साउथ अफ्रीका की कमजोरियों को पहचाना और अपना नेचुरल खेल खेला। भारत को पहली बार कॉमनवेल्थ में मेडल मिल सका है। इसी स्ट्रेटजी से हमने न्यूजीलैंड जैसी मजबूत टीम को हराया था।



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