राम रहीम की याचिका पर सुनवाई: बेअदबी जांच CBI को देने की मांग; पंजाब पुलिस की SIT ने डेरा मुखी को मास्टरमाइंड बताया

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चंडीगढ़23 मिनट पहले

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डेरा सच्चा सौदा मुखी राम रहीम।

डेरा सच्चा सौदा के मुखी राम रहीम की याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। राम रहीम ने श्री गुरू ग्रंथ साहिब की बेअदबी केस की जांच CBI से वापस लेने का विरोध जताया है। पिछली सुनवाई में डेरे के वकील ने 2 घंटे की दलील दी थी। डेरा मुखी इस वक्त रोहतक की सुनारियां जेल में संगीन अपराधों में कैद की सजा काट रहा है। पंजाब पुलिस की एसआईटी ने हाल ही में रिपोर्ट तैयार की, जिसमें राम रहीम को ही बेअदबी की साजिश का मास्टरमाइंड करार दिया गया है।

CM भगवंत मान ने सिख नेताओं को SIT जांच की 467 पेज की रिपोर्ट सौंपी। जिसमें कहा गया कि MSG मूवी रिलीज न होने पर बेअदबी की साजिश रची गई। जिसका मास्टरमाइंड राम रहीम है।

CM भगवंत मान ने सिख नेताओं को SIT जांच की 467 पेज की रिपोर्ट सौंपी। जिसमें कहा गया कि MSG मूवी रिलीज न होने पर बेअदबी की साजिश रची गई। जिसका मास्टरमाइंड राम रहीम है।

पहले SIT के पास थी जांच
पंजाब में साल 2015 में श्री गुरू ग्रंथ साहिब की बेअदबी के कई केस हुए थे। जिनकी जांच के लिए तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम(SIT) बनाई थी। इसके बाद यह जांच CBI के पास चली गई। बाद में सरकार बदल गई। कांग्रेस सत्ता में आई तो CM कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुआई में विधानसभा में प्रस्ताव पास कर जांच CBI से वापस ले ली गई।

SIT ने राम रहीम को बताया मास्टरमाइंड
पंजाब पुलिस की एसआईटी ने हाल ही में बेअदबी केस की जांच रिपोर्ट तैयार की। जिसमें राम रहीम को ही बेअदबी का मास्टरमाइंड बताया गया है। एसआईटी का दावा है कि पूरी साजिश डेरा सच्चा सौदा के हेडक्वार्टर सिरसा में रची गई। राम रहीम की फिल्म मैसेंजर ऑफ गॉड (MSG) रिलीज न होने के विरोध में बेअदबी की साजिश रची गई।

राम रहीम के वकील ने दी थी यह दलीलें
राम रहीम ने हाईकोर्ट में दलील दी कि एक आरोपी के बयान पर उन्हें बेअदबी केस में नामजद कर लिया गया। फिर उनके प्रोडक्शन वारंट भी जारी कर दिए गए। हालांकि हाईकोर्ट के आदेश पर पंजाब पुलिस की नई SIT ने सुनारिया जेल जाकर उनसे पूछताछ की। डेरा मुखी ने कहा कि उसे जानबूझकर इस केस में फंसाया जा रहा है। इसलिए केस की CBI जांच होनी जरूरी है। राजनीतिक हित के लिए जांच को सीबीआई से लेकर वापस एसआईटी को दिया गया। वहीं पंजाब सरकार ने इसे कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया। सरकार ने कहा कि विधानसभा के प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की भी मुहर लग चुकी है। इस याचिका को खारिज किया जाए।

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