मोरबी के गुनहगारों को बचाया: सिर्फ क्लर्क, गार्ड-मजदूर गिरफ्तार… ओरेवा, उसके MD और अफसरों का न FIR में नाम; न उनसे पूछताछ

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  • Gujarat Morbi Bridge Accident; Morbi Nagar Palika Officer | Ajanta Oreva Group MD Jaysukhbhai Patel

5 मिनट पहले

गुजरात के मोरबी में मच्छू नदी का केबल ब्रिज गिरने से मरने वालों की संख्या 141 हो चुकी है। इनमें 50 से ज्यादा बच्चे हैं। मौत के इन डराने वाले आंकड़ों के बीच इस घटना के जिम्मेदारों को बचाने का खेल भी शुरू हो गया है। सोमवार को पुलिस ने इस केस में जिन 9 लोगों को गिरफ्तार किया, उनमें ओरेवा के दो मैनेजर, दो मजदूर, तीन सिक्योरिटी गार्ड और दो टिकट क्लर्क शामिल हैं।

पुलिस की FIR में न तो पुल को ऑपरेट करके पैसे कमाने वाली ओरेवा कंपनी का जिक्र है, न रिनोवेशन का काम करने वाली देवप्रकाश सॉल्युशन का। पुल की निगरानी के लिए जिम्मेदार मोरबी नगर पालिका के इंजीनियरों का भी नाम इसमें नहीं है। यानी केवल छोटे कर्मचारियों को हादसे का जिम्मेदार ठहराकर सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है।

मोरबी पुल टूटने के तीसरे दिन (मंगलवार) को भी सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

एक झटके में 141 जानें लेने वाले इस हादसे को लेकर अफसर कितने गंभीर हैं, इसकी बानगी यह है कि राज्य सरकार ने जांच के लिए जिन 5 अधिकारियों की कमेटी बनाई थी, उसने भी महज 25 मिनट में अपनी जांच पूरी कर ली। आइए आपको सिलसिलेवार तरीके से बताते हैं कि मोरबी हादसे के ये गुनहगार कौन हैं…

एग्रीमेंट में मुनाफे पर फोकस, जिम्मेदारियों से किनारा
सस्पेंशन पुल को ऑपरेट करने के लिए ओरेवा कंपनी और मोरबी नगर पालिका के बीच 6 मार्च 2022 को जो एग्रीमेंट हुआ था, उसकी कॉपी दैनिक भास्कर के पास है। 300 रुपए के स्टांप पेपर पर हुए एग्रीमेंट में लिखा है कि कंपनी कब टिकट की दर बढ़ा सकेगी, कैसे पुल का कॉमर्शियल इस्तेमाल कर सकेगी और इसमें सरकारी एजेंसियों का दखल नहीं होगा। तीन पेज के एग्रीमेंट में इस बात का कहीं नहीं है कि हादसा होने की स्थिति में कौन जिम्मेदार होगा।

एग्रीमेंट की शर्तें तोड़कर महंगे टिकट बेचे
मोरबी नगरपालिका के साथ ओरेवा के समझौते के मुताबिक मरम्मत पूरी होने के बाद पुल को खोला जाना था। इस ब्रिज पर मार्च 2023 तक वयस्कों से से 15 रुपये और बच्चों से 10 रुपये टिकट लेने का प्रावधान था। साल 2023-24 से हर साल टिकट में 2 रुपए बढ़ाए जाने थे, लेकिन ओरेवा ने पुल खुलते ही ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए बड़ों के लिए 17 रुपए और बच्चों के लिए 12 रुपए का टिकट बेचना शुरू कर दिया।

ओरेवा ने पुल पर जाने के लिए ये टिकट हादसे वाले दिन यानी 30 अक्टूबर को बेचे थे।

ओरेवा ने पुल पर जाने के लिए ये टिकट हादसे वाले दिन यानी 30 अक्टूबर को बेचे थे।

टिकट में नगर पालिका के नाम का जिक्र तक नहीं
नियम के मुताबिक, जब कोई सरकारी संपत्ति किसी निजी कंपनी को संचालन के लिए दी जाती है, तो उस पर मालिकाना हक सरकारी संस्था के पास ही रहता है। जैसे, हाईवे पर टोल वसूली निजीं कंपनियां करती हैं, लेकिन रसीद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के नाम से ही जारी की जाती है। मोरबी के सस्पेंशन ब्रिज के मामले में ऐसा नहीं था। पुल और टिकट दोनों पर मोरबी नगर पालिका का जिक्र तक नहीं था।

जिन एंकर पिन पर पुल टिका था, उन्हें ही नहीं देखा
मोरबी त्रासदी तकनीकी तौर पर घोर लापरवाही का दुष्परिणाम है। दो करोड़ रु. से पुल की साज-सज्जा तो कर दी गई लेकिन पुल का भार उठाने वाले महत्वपूर्ण पुर्जे ‘एंकर पिन’ को मजबूत नहीं किया। इससे दरबारगढ़ की ओर लगी पुल की एंकर पिन उखड़ गई और हादसा हो गया।

एंकर पिन जमीन में फिट रहते हैं और सस्पेंशन ब्रिज को दोनों ओर से थामे रहते हैं।

एंकर पिन जमीन में फिट रहते हैं और सस्पेंशन ब्रिज को दोनों ओर से थामे रहते हैं।

एंकर पिन वह हिस्सा होता है, जो केबल्स पर झूलते पुल को दोनों ओर से थामे रहता है। मोरबी पुल के एंकर-पिन की क्षमता 125 व्यक्ति की है, लेकिन रविवार को 350 से अधिक व्यक्तियों को प्रवेश दे दिया गया। ठेकेदार और सरकारी इंजीनियर्स ने यह ध्यान ही नहीं दिया कि पुल 140 साल पुराना है। उसके एंकर पिन इतना बोझ संभालने में सक्षम ही नहीं थे।

7 महीने रिनोवेशन, 2 करोड़ खर्च पर नींव नहीं देखी
इसकी जांच के लिए विशेषज्ञ स्ट्रक्चरल इंजीनियरों के साथ-साथ स्थानीय इंजीनियरों से जानकारी प्राप्त की गई, जिससे पता चला कि सस्पेंशन ब्रिज के दोनों ओर दो एंकर पिन थे। इस पिन से पुल जुड़ा हुआ है और इसे नींव माना जाता है। जब नवीनीकरण किया गया था तो इस एंकर पिन को अनदेखा कर दिया गया था। पुराने पुल की नींव कितनी मजबूत है और कितना काम करना है, इस पर खर्च करने के बजाय सिर्फ सजावट पर ध्यान दिया गया।



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