महिलाएं स्टीयरिंग संभालने में भी बेहतर: देश में ड्राइवरों में महिलाओं की संख्या 7%, महज 3% भीषण हादसों का शिकार बनती हैं

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नई दिल्ली28 मिनट पहले

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अगर आप भी उन लोगों में से हैं, जो सोचते हैं कि महिलाएं अच्छी ड्राइवर नहीं होतीं तो यह खबर जरूर पढ़िए। भीषण हादसों का शिकार होने वाले ड्राइवरों में महिलाएं सिर्फ 3% ही हैं। सड़क एवं परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2020 में 56,334 (97.3%) पुरुष व 1551 (2.7%) महिला चालकों की हादसों में मौत हुई।

जबकि, देश के कुल 20.58 करोड़ ड्राइवरों में से 1.39 करोड़ महिलाएं (6.76%) हैं। जान गंवाने वाले पैदल यात्रियों में भी 19,188 (81.6%) पुरुष और 4299 (18.4%) महिलाएं हैं। दिल्ली सरकार की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 के दौरान दिल्ली में सड़क हादसों से कुल 1239 लोगों की मौत हुई, जिनमें सिर्फ 1% हादसों के लिए महिला ड्राइवर जिम्मेदार थीं। जबकि दिल्ली के ड्राइवरों में महिलाओं की हिस्सेदारी 8% है।

5 साल शोध; महिला ड्राइवर 50% से ज्यादा, तब भी इनके हिस्से कम दुर्घटनाएं
अगर आप ये सोच रहे हैं कि भारत में महिला चालकों की कुल संख्या कम है तो हादसे भी कम होंगे ही, तो ऑस्ट्रेलिया में हुए शोध के नतीजे पढ़िए…

  • ऑस्ट्रेलिया में 52% ड्राइवर महिलाएं हैं। यहां 2015 से 2019 के बीच 65,781 ड्राइवर या तो गंभीर घायल हुए या उनकी मौत हुई। इनमें से 54.5% पुरुष और 45.5% महिलाएं थीं।
  • 1996 से 2019 के बीच हुई स्टडी के मुताबिक सड़क हादसों में जान गंवाने वालों में महिलाएं 26% थीं। 2020 में 78% दुर्घटनाएं पुरुष चालकों से हुईं।

सुरक्षा की ज्यादा गारंटी; पुरुषों की ड्राइविंग में प्रति किमी दोगुना खतरा
ब्रिटेन में वर्ष 2005 से 2015 के बीच हुए ट्रेवल सर्वे…

  • कार और वैन की ड्राइविंग में महिलाओं के मुकाबले पुरुष ड्राइवर प्रति किमी दोगुने और बाइक चालक 10 गुना ज्यादा खतरनाक हैं।
  • शोध कहता है कि पुरुषों के मुकाबले महिलाएं स्पीड लिमिट का उल्लंघन 12% कम करती हैं।
  • ब्रिटेन में पुरुष व महिला ड्राइवरों की संख्या लगभग बराबर है, लेकिन 72% ट्रैफिक उल्लंघन पुरुष करते हैं। ड्रंकन ड्राइविंग में 84% और ओवरस्पीड में 78% पुरुष ड्राइवर ही पकड़े जाते हैं।

ड्राइवरलेस कारों में जेंडर सेटिंग की तैयारी, क्योंकि महिलाएं बेहतर ड्राइवर…
न्यूकैस्टल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार, ड्राइवरलेस कारों में भी लिंग और उम्र के हिसाब से सॉफ्टवेयर में बदलाव करने की जरूरत है। नई रिसर्च के नतीजे कहते हैं कि पुरुषों के मुकाबले महिला चालकों का रेस्पांस टाइम बेहतर है।

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