मजबूरी है कि बाढ़ में घर नहीं जा सकते: बाढ़ का पानी कमरे में घुसा तो लाइब्रेरी ठिकाना बन गया, छात्र बोले- बाढ़ झेल लेंगे पर बेरोजगारी नहीं

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14 मिनट पहलेलेखक: राजेश साहू और रक्षा सिंह

प्रयागराज का बेली इलाका। यहां करीब 20 हजार लड़के रहते हैं। इस वक्त 10 हजार बचे हैं। क्योंकि पूरा इलाका गंदे और बदबूदार पानी में डूबा है। इन 10 हजार छात्रों के सामने भी घर जाने का विकल्प था। लेकिन ये घर नहीं गए। लाइब्रेरी में जाकर रह लिए। क्योंकि इन्हें डर है कि अगर घर गए तो पढ़ाई का फ्लो टूट जाएगा।

दैनिक भास्कर की टीम बेली, राजापुर, सलोरी, छोटा भगाड़ा पहुंची। बाढ़ की कवरेज के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया। जिन घरों का पहला फ्लोर पानी में डूबा है वहां दूसरे फ्लोर पर लड़के पढ़ाई करते नजर आए। आइए बारी-बारी से सभी हिस्सों का हाल जानते हैं।

सबसे पहले बात राजापुर की।

बाढ़ में कमरा डूबा तो लाइब्रेरी बनी सहारा

छात्रों के कमरों में पानी भरा है, इसलिए वो जिस लाइब्रेरी में पढ़ाई करने जाते हैं। वहीं रह रहे हैं।

राजापुर में विजन लाइब्रेरी है। यहां करीब 250 छात्र रोज पढ़ाई करने आते हैं। इसमें करीब 100 लड़के-लड़कियां ऐसे थे जिनका कमरा बाढ़ में डूब गया। इनके पास विकल्प था कि घर चले जाएं पर नहीं गए। विजन लाइब्रेरी में ही रहने लगे। गोरखपुर के रमेश चंद्र बताते हैं, “बाढ़ के बीच हमारा फ्रस्ट्रेशन बढ़ गया। हमारी किताबें भीग रहीं। हमारे पास खाना बनाने की व्यवस्था नहीं। घर जाएंगे तो पढ़ाई का फ्लो टूट जाएगा। इसलिए लाइब्रेरी में ही रहने लगे।”

UPSC की तैयारी कर रही वाराणसी की वंदना बताती हैं, “कमरे में पानी भर गया। हम घर जाने वाले थे। तभी लाइब्रेरी वाले भइया से बात की तब उन्होंने कहा, यहां रह सकती हो। हम पांच लड़कियां लाइब्रेरी में ही रहें।” जौनपुर के शुभम यादव कहते हैं, “घर तो चले जाएं पर बेरोजगारी, बाढ़ से बड़ी समस्या है। अगर शिक्षा मंत्री से आपकी बात होती हो तो उनसे शिक्षक भर्ती की बात जरूर करिएगा।”

बाढ़ में सारा सामान बह गया

तस्वीर में अंकुर यादव हैं। उनके रूम में बाढ़ का पानी भर गया है। सारा सामन, किताबें भीग गई हैं।

तस्वीर में अंकुर यादव हैं। उनके रूम में बाढ़ का पानी भर गया है। सारा सामन, किताबें भीग गई हैं।

छोटा बघाड़ा जिले का सबसे अधिक बाढ़ प्रभावित इलाका है। पानी के बीच हम किसी तरह यहां पहुंचे तो गाजीपुर के अंकुर यादव 2 फुट पानी के बीच अपने रूम में कुछ सामान खोज रहे थे। अंकुर कहते हैं, “जब पानी बढ़ा तो हम बाहर गए थे। वापस आए तो नीचे रखा सामान डूब गया। अब मजबूरन घर जाना पड़ेगा। क्योंकि यहां रह गए तो बीमार हो जाएंगे।”

नदी के किनारे 500 रुपए सस्ते कमरे मिलते हैं
प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे जौनपुर के आरडी यादव से हमने पूछा, बाढ़ के बीच ही कमरे क्यों लिया? कहीं और क्यों नहीं लिया? आरडी बताते हैं कि यहां 2500 रुपए में कमरा मिल जाता है लेकिन दूसरे हिस्सों में 3000 रुपए से कम में कमरे नहीं हैं। हम ऐसे परिवार से हैं जिसके लिए 500 रुपए बहुत मायने रखते हैं।

हम बाकी के हिस्सों में छात्रों की स्थिति जानें इसके पहले यहां के कोचिंग संस्थानों की स्थिति जान लेते हैं।

1 दर्जन कोचिंग संस्थान बंद हो गए
बाढ़ के बीच दैनिक भास्कर की टीम कोचिंग संस्थानों की स्थिति देखने पहुंची। हर कोचिंग में क्षमता से आधे छात्र ही मिले। जार्जटाउन में उत्थान कोचिंग के संचालक संजीव तिवारी बताते हैं, “दो साल पहले कोरोना ने कमर तोड़ी, पिछले साल अक्टूबर में स्थिति सुधरी तो डेल्टा वायरस और अब बाढ़ ने कोचिंग के धंधे को पूरी तरह से तोड़ दिया।” दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में कोचिंग चलाने वाली प्रबल एकेडमी ने यहां अपना संस्थान बंद कर दिया। छोटे-बड़े करीब एक दर्जन संस्थानों ने कोचिंग संस्थान ही बंद कर दिया।

छात्र बाढ़ के कारण अपने घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे। कोचिंग संस्थान खाली पड़े हैं।

छात्र बाढ़ के कारण अपने घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे। कोचिंग संस्थान खाली पड़े हैं।

फीस देकर छात्र बोले, सर अब पता नहीं कब आना होगा
संजीव तिवारी बताते हैं, “बाढ़ के चलते छात्र कन्फ्यूज हैं। कुछ ने फीस जमा कर दी लेकिन कमरा बाढ़ के चलते डूब गया। वह हमारे पास आते हैं और कहते हैं, सर अब पता नहीं कब आना होगा।” यहां न सिर्फ कोचिंग संस्थान का घाटा है, बल्कि उन छात्रों का भी घाटा है जिनका कीमती वक्त बाढ़ के चलते बर्बाद हो रहा है।

अब हम सलोरी की स्थिति जानते हैं जहां की स्थिति खतरनाक नजर आई।

अगले हफ्ते परीक्षा, घर गए तो पिछड़ जाएंगे
सलोरी में करीब 30 हजार छात्र रहते हैं। पूरा इलाका जलमग्न होने के बाद भी करीब 10 हजार छात्र दूसरे और तीसरे फ्लोर पर टिके हैं। गाजीपुर के आलोक वर्मा उनमें से एक हैं। कहते हैं, “6 सितंबर को लखनऊ यूनिवर्सिटी में पीएचडी का और 25 सितंबर को राजस्थान पीटीआई की परीक्षा है। घर चले जाएंगे तो पढ़ाई नहीं कर पाएंगे। इसलिए बाढ़ में ही रुक गए। करियर ज्यादा जरूरी है।”

यहां तक हमने बढ़ते पानी की बात की। अब पानी घट रहा है, लेकिन चुनौती पहले से ज्यादा बड़ी हो गई।

गंदगी से पूरा इलाका बीमार हो जाएगा

बाढ़ के कारण पूरा इलाका गंदगी से भर गया है। छात्रों ने कहा कि बाढ़ आने से ज्यादा परेशानी बाढ़ खत्म होने के बाद आती है।

बाढ़ के कारण पूरा इलाका गंदगी से भर गया है। छात्रों ने कहा कि बाढ़ आने से ज्यादा परेशानी बाढ़ खत्म होने के बाद आती है।

आलोक वर्मा ने बताया, “बाढ़ के पानी के साथ इलाके की सारी गंदगी लोगों के घरों में चली गई। छोटे-छोटे कीड़े आकर कपड़ों में चिपक जा रहे हैं। जैसे ही यह पानी वापस लौटेगा यह तेजी से बढ़ेंगे। ऐसे में जरूरी है कि प्रयागराज नगर निगम इसे ध्यान दे और सफाई को बेहतर ढंग से करवाया जाए।”

पिछले तीन दिन से घटने लगा है पानी
फिलहाल शहर में गंगा और यमुना खतरे के निशान से नीचे आ गई हैं। फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 84.51 सेंटीमीटर हो गया। यहां खतरे का निशान 84.734 है। दूसरी तरफ नैनी में यमुना 84.27 सेंटीमीटर के स्तर पर बह रही है। ऐसा अनुमान है कि आने 15 दिनों में स्थिति सामान्य हो।



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