बिलावल से क्यों नहीं मिले रूसी फॉरेन मिनिस्टर: जानबूझकर मीटिंग में काफी देर से पहुंचे, भारत को नाराज नहीं करना चाहते थे

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इस्लामाबादएक घंटा पहले

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पिछले हफ्ते उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) के 8 परमानेंट मेंबर्स के विदेश मंत्रियों की मीटिंग हुई। भारत के अलावा रूस, चीन और पाकिस्तान के फॉरेन मिनिस्टर्स ने इसमें शिरकत की। हमारे विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बिलावल को छोड़ बाकी सभी देशों के फॉरेन मिनिस्टर्स के साथ बातचीत की। दूसरी तरफ, पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी सिर्फ तीन देशों के फॉरेन मिनिस्टर्स से मिले।

अब पाकिस्तानी मीडिया का एक हिस्सा दावा कर रहा है कि रूस के विदेश मंत्री सर्गेइ लावरोव और बिलावल की मीटिंग शेड्यूल होने के बावजूद इसलिए नहीं हो सकी, क्योंकि लावरोव वक्त पर नहीं पहुंचे। रिपोर्ट्स का दावा है कि लावरोव बिलावल से मुलाकात करके भारत को नाराज नहीं करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने बिलावल से दूरी बनाई। ये भी पढ़ें : SCO में नहीं मिले जयशंकर-बिलावल:1 फीट दूरी पर बैठे थे दोनों देशों के विदेश मंत्री

कैसे हुआ ये सब

  • पाकिस्तान के स्ट्रैटेजिक अफेयर एक्सपर्ट और डिफेंस एनालिस्ट डॉक्टर कमर चीमा ने सोशल मीडिया पर बिलावल और लावरोव के मामले पर तफ्सील से जानकारी दी है।
  • चीमा कहते हैं- रूस और पाकिस्तान के फॉरेन मिनिस्टर्स की मुलाकात तय थी। इसके लिए तैयारी भी की जा चुकी थी। हमारे फॉरेन मिनिस्टर शेड्यूल के मुताबिक, लावरोव से मिलने पहुंच गए। वो काफी देर तक इंतजार तक करते रहे, लेकिन रूसी विदेश मंत्री नहीं पहुंचे। कुल मिलाकर यह मीटिंग नहीं हो सकी।
  • चीमा के मुताबिक, ये मुलाकात न होने की एक बड़ी वजह थी। डॉक्टर जयशंकर और बिलावल ने बिल्कुल बगल में बैठने के बावजूद हाय-हैलो तक नहीं की। जाहिर है दोनों देशों का तनाव साफ नजर आया। लावरोव मौके की नजाकत भांप गए। वो भारत को नाराज करने का जोखिम नहीं लेना चाहते थे।
  • रूस-यूक्रेन जंग के दौरान भारत ने किसी भी प्लेटफॉर्म पर रूस की निंदा तक नहीं की। मोदी सरकार ने हर बार जंग रोकने को कहा। इस दौरान भारत ने रूस से सस्ता फ्यूल भी जमकर खरीदा। लावरोव कतई नहीं चाहते थे कि भारत से ऐतिहासिक संबंधों पर कोई गलत असर पड़े।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री और डॉक्टर जयशंकर उज्बेक राष्ट्रपति के डिनर से पहले भी एक मीटिंग में साथ थे। यहां भी दोनों की बातचीत नहीं हो सकी।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री और डॉक्टर जयशंकर उज्बेक राष्ट्रपति के डिनर से पहले भी एक मीटिंग में साथ थे। यहां भी दोनों की बातचीत नहीं हो सकी।

हिना जातीं तो बेहतर होता
कमर चीमा के अलावा एक और जर्नलिस्ट गौहर बट के मुताबिक, SCO समिट में बिलावल की जगह अगर विदेश राज्य मंत्री हिना रब्बानी खार जातीं तो ज्यादा बेहतर होता। उन्हें डिप्लोमैसी का काफी अनुभव है। बिलावल तो मंत्री भी पहली बार ही बने हैं। वो जयशंकर के सामने कहीं नहीं टिकते। बट कहते हैं- SCO बेहद अहम प्लेटफॉर्म है। 8 देशों में से सिर्फ चीन ऐसा है, जो पाकिस्तान को थोड़ी-बहुत तवज्जो देता है। वो भी इसलिए, क्योंकि उसके पाकिस्तान में बहुत बड़े इंट्रेस्ट और एकतरफा इन्वेस्टमेंट्स हैं। ऐसे में हिना वहां मौजूद होतीं तो शायद कुछ फर्क पड़ता।

चीमा के मुताबिक, सवाल ये है कि अगले महीने 15 और 16 सितंबर को जब उज्बेकिस्तान के समरकंद में ही SCO के हेड ऑफ द स्टेट्स की मीटिंग होगी तो क्या शाहबाज शरीफ और नरेंद्र मोदी हाथ भी मिलाएंगे? जब विदेश मंत्री नहीं मिले तो क्या प्रधानमंत्री मिल पाएंगे। उम्मीद कम है।

अगला महीना अहम
SCO के लिए अगला महीना यानी सितंबर बेहद अहम होने जा रहा है। सभी 8 देशों के राष्ट्रप्रमुख उज्बेकिस्तान के समरकंद में जुटेंगे। 15 और 16 सितंबर तक यह सम्मेलन चलेगा। इस मीटिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन भी हिस्सा ले सकते हैं।

पाकिस्तान के कई जर्नलिस्ट्स दावा कर रहे हैं कि बैकडोर डिप्लोमैसी और अमेरिकी दखल के चलते इस मीटिंग में प्रधानमंत्री मोदी और शाहबाज शरीफ की मुलाकात हो सकती है। हालांकि, तस्वीर का दूसरा पहलू ये है कि पाकिस्तान में भारी सियासी उथलपुथल के बीच शरीफ की कुर्सी किसी भी वक्त जा सकती है।

SCO में शामिल देश
भारत, चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान और पाकिस्तान। इसके अलावा चार ऑब्जर्वर नेशन्स हैं।

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