पाकिस्तान ने लश्कर के आतंकी का शव स्वीकारा: 20 सालों में पहली बार कुबूल किया आतंकी कनेक्शन; J&K में LOC के पास पकड़ा गया था हुसैन

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9 मिनट पहले

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घायल होने के बाद हुसैन को तुरंत मेडिकल ट्रीटमेंट दिया गया था। होश आने के बाद उसने साजिश का खुलासा किया था।

पाकिस्तान ने सोमवार को लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी का शव स्वीकार कर लिया। खास बात यह है कि 20 सालों में पहली बार पाकिस्तान ने आतंकी कनेक्शन को कुबूल किया है। सेना के एक अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान ने इससे पहले जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल अपने नागरिकों के शव लेने से हमेशा इनकार किया है।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) के कोटली के सब्जकोट गांव के निवासी तबारक हुसैन (32) ने पिछले महीने 21 अगस्त को राजौरी के नौशेरा सेक्टर से भारत में घुसपैठ करने का प्रयास किया। इस दौरान उसे पैर और कंधे पर गोली लग गई थी। सुरक्षा बलों ने उसे घायल व्यवस्था में अस्पताल भर्ती करवाया, जहां उसका ऑपरेशन किया गया। सैनिकों ने उसकी जान बचाने के लिए तीन यूनिट रक्तदान किया।

पूछताछ के दौरान हुसैन ने भारतीय पोस्ट पर हमले की साजिश का खुलासा किया था। उसने बताया था कि उसके साथ चार आतंकी भेजे गए थे। इसी बीच पिछले शनिवार यानी 3 सितंबर को राजौरी के एक अस्पताल में कार्डियक अरेस्ट (दौरान दिल का दौरा) से हुसैन की मौत हो गई। रविवार को पोस्टमॉर्टम सहित सभी फॉर्मेलिटी पूरी की गई। इसके बाद पाकिस्तान आर्मी से संपर्क किया गया।

सेना के एक अधिकारी ने बताया कि हुसैन की मौत के दो दिन के बाद उसका शव पाकिस्तान को सौंपा गया। सोमवार को भारतीय सेना ने पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा पर चाकन दा बाग चौराहे पर पुलिस और सिविल अधिकारियों की मौजूदगी में शव पाकिस्तानी अधिकारियों को सौंपा।

इसी एंबुलेंस में ले जाकर आतंकी तबारक का शव पाकिस्तानी अधिकारियों को सौंपा गया।

इसी एंबुलेंस में ले जाकर आतंकी तबारक का शव पाकिस्तानी अधिकारियों को सौंपा गया।

डॉ मनमीत कौर ने बताया, “हमें सूचना मिली थी एक शव को पाकिस्तान को सौंपना है। हमने शव को सुबह करीब 11:06 बजे शव उन्हें (पाक अधिकारियों को) सौंप दिया।

आतंकी के शव को इस वाहन में ले जाया गया।

आतंकी के शव को इस वाहन में ले जाया गया।

हमला करने के दिए थे 30 हजार पाकिस्तानी रुपए
हुसैन ने पूछताछ में खुलासा किया था कि उसे और उसके 3 साथियों को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के कर्नल यूनुस चौधरी ने LOC पार करने के बाद भारतीय सैनिकों पर फिदायीन हमले को अंजाम देने के लिए पैसे और चार से पांच बंदूकें दी थीं। कर्नल ने उसे भारतीय पोस्ट पर हमला करने के लिए 30 हजार पाकिस्तानी रुपए दिए थे। भारतीय सेना से मुठभेड़ में हुसैन को गोली लगी थी, जबकि उसके साथी फरार हो गए थे।

2016 में भी हो चुका है गिरफ्तार
हुसैन एक एक ट्रेंड आतंकी था। उसे 2016 में भी इसी इलाके से भारतीय सेना ने गिरफ्तार किया था। तब वह अपने भाई हारून अली के साथ आया था। हालांकि तब सेना ने उसे मानवीयता के आधार पर रिहा कर दिया था। उसे नवंबर 2017 में पाकिस्तान वापस भेज दिया गया था।

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