कॉमनवेल्थ सिल्वर मेडलिस्ट विकास का मूसेवाला के अंदाज में जश्न: सिद्धू की याद में 2 दिन भूखे रहे थे, मुकाबले से पहले उनके ही गाने सुन रहे थे

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बर्मिंघम44 मिनट पहले

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कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय वेटलिफ्टर्स का जलवा लगातार बरकरार है। वेटलिफ्टिंग में विकास ठाकुर ने मेंस 96 Kg कैटेगरी में सिल्वर मेडल जीता। जीत जितनी शानदार थी, जश्न उतना ही यादगार रहा। दरअसल, इस धमाकेदार प्रदर्शन के बाद विकास ने सिद्धू मूसेवाला के अंदाज में जश्न मनाया।

सिद्धू की दर्दनाक हत्या के बाद विकास फूट-फूटकर रोए थे। इसलिए उन्होंने अपने ही अंदाज में इस मरहूम सिंगर को श्रद्धांजलि दी। विकास ने 96 किलो वर्ग में 346 किलो वजन उठाकर सिल्वर मेडल जीता। इससे पहले उन्होंने 2014 के ग्लास्गो गेम्स में 86 किलो में सिल्वर और फिर 2018 के गोल्ड कोस्ट गेम्स में 94 किलो में ब्रॉन्ज मेडल जीता था।

विकास ठाकुर ने लगातार तीसरे कॉमनवेल्थ खेलों में मेडल जीता।

विकास ठाकुर ने लगातार तीसरे कॉमनवेल्थ खेलों में मेडल जीता।

पंजाबी गायक मूसेवाला की हत्या ने पूरे देश को हिला दिया था। इस मामले में जांच जारी है और पंजाब और दिल्ली पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस सबसे अलग, युवाओं के बीच अपने गानों के कारण काफी लोकप्रिय रहे मूसेवाला के निधन ने उनके फैंस को झकझोर दिया। 28 साल के भारतीय वेटलिफ्टर विकास भी उन युवाओं में से एक थे, जिन पर मूसेवाला की मौत का गहरा असर पड़ा था।

सिद्धू की याद में भूखे रहे थे विकास
मंगलवार, 2 अगस्त को बर्मिंघम में भारत के झंडे को बुलंद करने वाले विकास ने सिल्वर मेडल अपने नाम करने के बाद बताया कि इन खेलों में शामिल होने के लिए भारत से आते हुए उन्होंने सिद्धू मूसेवाला के ही गाने सुने। मुकाबले के दौरान भी मूसेवाला के गानों के बारे में सोच रहे थे।

विकास ने अपनी लिफ्ट के बाद मूसेवाला के अंदाज में जांघ पर थपकी मारी थी। इस बारे में उन्होंने बाद में कहा, ‘पंजाबी थप्पी सिद्धू मूसेवाला को श्रद्धांजलि थी। उनकी हत्या के बाद दो दिन मैने खाना भी नहीं खाया था। मैं उनसे कभी मिला नहीं लेकिन उनके गीत हमेशा मेरे साथ रहेंगे। यहां आने से पहले भी मैं वही सुन रहा था। मैं हमेशा उनका बड़ा प्रशंसक रहूंगा।’

मूसेवाला की 29 मई को मानसा के गांव जवाहरके में गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी।

मूसेवाला की 29 मई को मानसा के गांव जवाहरके में गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी।

पर्यावरण के नाम पर सिद्धू ने मांगा था वोट
सिद्धू मूसेवाला का दिल अपने गांव मूसा के लिए धड़कता था। इसीलिए उन्हें उनके नाम से नहीं बल्कि गाँव के नाम से जाना जाता था। वह लोगों को वोट मांगने के लिए गाँव-गाँव जाने के लिए कहते थे। उन्हें मानसा से कांग्रेस का टिकट मिला था, जहां उन्हें आम आदमी पार्टी (आप) के विजय सिंगला के खिलाफ खड़ा किया गया था।

हैरानी की बात यह है कि उन्होंने किसी भी बड़े वादों से दूर एक बहुत ही अलग अभियान चलाया। उन्होंने स्वच्छ वातावरण को अपना चुनावी मुद्दा बनाया। प्रचार के दौरान उन्होंने कहा, “हमें उस हवा को साफ करने की जरूरत है जिसमें हम सांस लेते हैं, जो पानी हम पीते हैं, जो खाना हम खाते हैं।”

चुनाव हारने पर वोटर्स को सिद्धू ने कहा था देशद्रोही
विजय सिंगला से हारने पर सिद्धू ने मतदाताओं को देशद्रोही बताते हुए उनके खिलाफ जमकर हंगामा किया। लेकिन वह मूसेवाला थे। हाल ही में जब विजय सिंगला को करप्शन के आरोप में पंजाब के मंत्रीमंडल से बर्खास्त किया गया तो सिद्धू ने एक प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया। यह उनकी आखिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस थी।

विधानसभा चुनाव में मिली हार से सिद्धू मूसेवाला काफी निराश हुए थे।

विधानसभा चुनाव में मिली हार से सिद्धू मूसेवाला काफी निराश हुए थे।

सिद्धू अपने गाँव से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर जिए और मर गए। पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला ने हाल ही में एक गाना गाया था जिसका अर्थ था कि वह कम उम्र में मर जाएगा। ‘द लास्ट राइड’ शीर्षक वाले ट्रैक में, जिसे खुद मूसेवाला ने लिखा था। उन्होंने लिखा था कि कम उम्र में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनका कहा सच हो गया।

गलत संगत से बचाने के लिए दीपक ने चुना खेलों का रास्ता
लगातार तीसरे कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीतने वाले लुधियाना के वेटलिफ्टर ने इस खेल में आने की अपनी कहानी के बारे में बताते हुए कहा, ‘मैं अपना होमवर्क जल्दी कर लेता था और कहीं मैं बुरी संगत में नहीं पड़ जाऊं, इसलिये मेरे माता पिता ने मुझे खेलों में डाला। एथलेटिक्स, मुक्केबाजी में हाथ आजमाने के बाद मैने वेटलिफ्टिंग को चुना।’

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