एशिया विजिट पर नैंसी पेलोसी: 4 देशों का दौरा करेंगी, सिंगापुर के लिए रवाना हुईं; ताइवान का जिक्र तक नहीं

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31 मिनट पहले

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अमेरिकी संसद की स्पीकर नैंसी पेलोसी एशिया के 4 देशों का दौरा करेंगी। आज वो सिंगापुर के लिए रवाना हुई हैं। इसके बाद वो मलेशिया, साउथ कोरिया और जापान जाएंगी। उनके दौरे को लेकर चीन काफी नाराज था। चीन की नाराजगी की वजह पेलोसी का ताइवान दौरा था। पहले खबरें थीं कि नैंसी ताइवान की विजिट करेंगी, लेकिन हाल ही में जारी हुए एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, उनकी दौरे की लिस्‍ट में ताइवान का नाम शामिल नहीं है।

सिंगापुर के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पेलोसी 2 दिवसीय सिंगापुर यात्रा में सिंगापुर के राष्ट्रपति हलीमा याकूब और प्रधानमंत्री ली सीन लूंग के साथ बैठक करेंगी।

सिंगापुर के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पेलोसी 2 दिवसीय सिंगापुर यात्रा में सिंगापुर के राष्ट्रपति हलीमा याकूब और प्रधानमंत्री ली सीन लूंग के साथ बैठक करेंगी।

पेलोसी के ताइवान दौरे को लेकर परेशान था अमेरिका
राष्ट्रपति जो बाइडेन की सरकार और अमेरिकी मिलिट्री पेलोसी के ताइवान दौरे को लेकर काफी टेंशन थी। उन्हें डर था कि चीन नैंसी के प्लेन पर हमला कर सकता है। दरअसल, चीन ने ताइवान के पास एक मिलिट्री ड्रिल की। इससे हमले का खतरा बढ़ गया।

नैंसी पेलोसी पहले अप्रैल में ताइवान के दौरे पर जाने वाली थीं, लेकिन कोरोना पॉजिटिव होने की वजह से उन्‍होंने अपना दौरा टाल दिया था।

नैंसी पेलोसी पहले अप्रैल में ताइवान के दौरे पर जाने वाली थीं, लेकिन कोरोना पॉजिटिव होने की वजह से उन्‍होंने अपना दौरा टाल दिया था।

ताइवान दौरे को लेकर कोई पुष्टि नहीं
हालांकि, पेलोसी ने अभी तक अपने ताइवान दौरे को लेकर कोई पुष्टि नहीं की है। चीन को डर है कि पेलोसी ताइवान जा सकती हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि पेलोसी अपना इरादा बदलकर ताइवान जा सकती हैं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि सुरक्षा के लिहाजे से उनके ताइवान दौरे को सीक्रेट रखा जा रहा है। अगर नैंसी पेलोसी ताइवान जाती हैं तो 25 साल में पहली बार ऐसा होगा कि अमेरिका का कोई इतना बड़ा नेता वहां की ऑफिशियल विजिट करेगा।

ताइवान पर US-चीन में जंग का खतरा बना हुआ है। बाइडेन की वॉर्निंग के बावजूद चीन हमला कर सकता है। जानिए कितना मुश्किल है ताइवान पर कब्जा करना…

जिनपिंग ने दे दी थी बाइडेन को धमकी
न्यूज एजेंसी ‘रॉयटर्स’ के मुताबिक, ताइवान में अमेरिकी दखलंदाजी से नाराज चीनी राष्ट्रपति ने बाइडेन को धमकी दे दी थी। जिनपिंग ने कहा था- मैं आपसे सिर्फ इतना कहूंगा कि जो लोग आग से खेलने की कोशिश करते हैं, वो जल जाते हैं।

28 जुलाई को देर रात बाइडेन और जिनपिंग की बातचीत हुई। करीब 2 घंटे 17 मिनट चली बातचीत के दौरान जिनपिंग का रवैया काफी तल्ख रहा।

28 जुलाई को देर रात बाइडेन और जिनपिंग की बातचीत हुई। करीब 2 घंटे 17 मिनट चली बातचीत के दौरान जिनपिंग का रवैया काफी तल्ख रहा।

इस वॉर्निंग के सीधे मायने ये हैं कि दोनों देशों के बीच कड़वाहट तेजी से बढ़ रही है। चीन को यह कतई मंजूर नहीं है कि अमेरिका और बाइडेन एडमिनिस्ट्रेशन ताइवान की मदद करे।

ताइवान को लेकर क्यों आमने-सामने हैं US और चीन
चीन वन-चाइना पॉलिसी के तहत ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र देश की तरह देखता है। चीन का लक्ष्‍य ताइवान को उनकी राजनीतिक मांग के आगे झुकने और चीन के कब्‍जे को मानने के लिए ताइवान को मज‍बूर करने का रहा है।

इधर, अमेरिका भी वन चाइना पॉलिसी को मानता है, लेकिन ताइवान पर चीन का कब्जा नहीं देख सकता। बाइडेन ने 2 महीने पहले कहा था- हम वन चाइना पॉलिसी पर राजी हुए, हमने उस पर साइन किया, लेकिन यह सोचना गलत है कि ताइवान को बल के प्रयोग से छीना जा सकता है। चीन का ये कदम न केवल अनुचित होगा, बल्कि यह पूरे क्षेत्र को अस्थिर कर देगा।

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