एकता कपूर की आंखों से निकले आंसू: कहा- बुरा लगता है जब एहसास होता है कि हमें पेरेंट्स की बढ़ती उम्र की चिंता करनी पड़ रही है

0
12



मुंबई17 घंटे पहलेलेखक: अमित कर्ण

एकता कपूर वैसे तो बड़ी बोल्ड और वेब प्रोड्यूसर मानी जाती हैं। असल जिंदगी में भी वो कम ही मौकों पर नम आंखों में नजर आईं हैं। मगर अपनी अगली फिल्म गुडबाय के ट्रेलर लॉन्च पर उनका इमोशनल आस्पेक्ट देखने को मिला।

दरअसल, फिल्म का प्लॉट बच्चों उनके पेरेंट्स के आपसी आरग्युमेंट्स का है, जो जेनरेशन गैप की वजह से आता है। इसी के इर्द गिर्द जब एकता कपूर, रश्मिका मंदाना और नीना गुप्ता से उनके पेरेंट्स से रियल लाइफ में हुई आरग्युमेंट्स के बारे में पूछा गया तो एकता कपूर इमोशनल हो गईं।

एकता कपूर की आंखों से निकले आंसू
सवाल का जवाब देते वक्त एकता की आंखों में आंसू आ गए। नम आंखों से उन्होंने कहा, ‘हमने न सिर्फ आरग्युमेंट, बल्कि अपने पेरेंट्स को तो कई बार काफी कुछ बोला भी है। गुस्सा भी किया है। लेकिन कई बार हम डर जाते हैं। हम यकीन नहीं कर पाते कि लाइफ में कभी उनके बगैर भी रहना होगा।

शायद यह हमारी ऐज है, जब हम अपने पेरेंट्स के बारे में चिंता करने लग जाते हैं। कभी कभी लगता है कि हमें क्यों अपनों की चिंता करनी पड़ रही है। वो क्यों नहीं ताउम्र स्वस्थ रहें। मुझे जब एहसास होता है कि हमें पेरेंट्स की चिंता करनी पड़ रही है तो वो चीज मुझे बिल्कुल अच्छी नहीं लगती। मैं उस पहलू से हेट करती हूं । ’

रश्मिका ने कहा मैं बहुत पहले मैच्योर हो चुकी थी
रश्मिका ने कहा, ‘मेरा अपने पेरेंट्स के साथ आरग्युमेंट का मौका नहीं आया, क्योंकि मैं कम ऐज से ही हॉस्टल में रही। हालांकि आप वैसों से ही झगड़ते हो, जिन्हें आप अपना मानते हो। जो आप के साथ सदा साथ रह रहें हैं। मेरे मामले में यह हुआ कि मुझे जब अपने पेरेंट्स के साथ रहने का मौका मिला तो उस वक्त तक मैं पहले से ही मैच्योर हो चुकी थी।

समझने लग गई थी कि वो क्या और क्यों कह रहें हैं? तभी हमारी फिल्म स्पेशल है इस मायने में कि यह सब तो हर घर में होता है। हर किसी के मां, बाप, भाई, बहन होते हैं। लिहाजा यह फिल्म अपने सब्जेक्ट के लिहाज से लोगों के दिलों के कोर को टच करने वाली है। इसका ट्रेलर देख लोगों के चेहरे पर टियरिंग स्माइल आने वाली है।’

नीना गुप्ता ने याद किया अपना बचपन
नीना गुप्ता ने कहा, ‘मैंने अपने बचपन में अपनी मां से बहुत मार खाई है। मैं अपनी बेटी मसाबा से कहती रहती हूं कि मैं तुम्हारी वो मम्मी नहीं हूं, जो मेरी मां हुआ करती थीं। मैं थोड़ी मॉर्डन हूं। खैर, मुझे मार पड़ती थी कि मैं बालों में तेल नहीं लगाती थी।

यह बात मुझे इस वक्त याद आई है, तो जेनरेशन गैप तो होता है। एक बात मैं मसाबा से कह भी रही थी कि आप चाहे कितने भी सफल हो जाओ, अगर पारिवारिक सुख नहीं है तो सफलताएं बेईमानी हैं। मेरी जिंदगी में भी मसाबा जब नहीं थी तो तब आउटडोर शूट अच्छे लगते थे, मगर मसाबा आने के बाद वो शूट खटकते थे। ’



Source link