अंशु का देश को बर्थ–डे गिफ्ट: 21वें जन्मदिन पर जीता पहला मेडल; हार से मायूस हुईं तो पिता ने दी हिम्मत

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रोहतक6 घंटे पहले

हरियाणा के जींद की पहलवान अंशु मलिक ने अपने 21वें जन्मदिन पर कॉमनवेल्थ गेम्स में देश, परिवार व खुद को बर्थ-डे गिफ्ट के रूप में चांदी का तोहफा दिया। चोटिल होने के बाद भी उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन फाइनल मुकाबला जीत नहीं पाईं। गोल्ड मेडल न जीत पाने पर वह मायूस दिखीं। जिस पर उनके पिता ने हिम्मत दी और कहा किसी को अपना दुख ना दिखाओ। आगे और बेहतर प्रदर्शन करना।

हरियाणा के जिला जींद के गांव निडानी निवासी अंशु मलिक ने कॉमनवेल्थ गेम में रजत पदक अपने नाम किया। अंशु का 5 अगस्त को ही 21वां जन्मदिन था और उसी दिन उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम में अपना पहला मेडल जीता। उन्होंने कहा कि जो कमी इस गेम में रह गई वह आगे पूरी करेंगी।

मार्च में हुई थी चोटिल

अंशु मलिक ने कहा कि मार्च में एशियन चैंपियनशिप थी। उस समय एल्बो में चोट लग गई थी। इसके बाद ट्रायल हो गए और लगातार प्रतियोगिताएं चल रही हैं। इस कारण रिकवरी का समय नहीं मिल पाया। कुश्ती के दौरान अपना बेहतर प्रदर्शन करना होता है, जबकि रिकवरी के लिए समय लगता है।

मैट पर दिया 100%

उन्होंने कहा कि मैट पर अपना 100% दिया है। चोट लगने के कारण जितना भी अच्छा प्रदर्शन कर सकती थी, उतना किया। यह नहीं कि मैट से कुछ भी बचाकर लाई हों। गोल्ड मेडल तो नहीं जीत पाई, लेकिन रजत पदक देश को दिलाया। कोशिश रहेगी की ऐसा आगे ना हो। आगामी प्रतियोगिताओं में और अधिक बेहतर प्रदर्शन करेंगी।

बेटी को हिम्मत देने के लिए फोन उठाते ही हंसने लगे पिता

अंशु मलिक ने कहा कि वे अपने पिता से प्रेरणा लेकर बड़ी हुई हैं। उनके पिता ने ही खेलने के लिए भेजा था। जब बाउट हारीं तो वह मायूस थीं। उनके पिता व अन्य लोगों के फोन आए हुए थे। जब अपने पिता से बात की और उन्होंने जैसे ही फोन उठाया तो वह हंसने लगे, ताकि हिम्मत मिले। उन्होंने मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि कोई नहीं, हार भी होती रहती है। किसी को भी ना दिखाओ कि आप कितने दुखी हो। आगे और अधिक बेहतर करो।

अच्छी ट्रेनिंग होती तो बदल जाता मेडल का रंग

उन्होंने कहा कि घायल होने के कारण हाथों का वर्क (अभ्यास) नहीं हो पाया। अगर एक महीना भी अच्छी ट्रेनिंग हुई होती तो शायद परिणाम कुछ और ही होने थे। खेल के दौरान एल्बो में दिक्कत हो रही थी। जो पॉजिशन आ रही थी, उसमें पिछले चार महीने में दिक्कत थी। इसलिए वे गोल्ड मेडल जीतने के सपने को पूरा नहीं कर पाईं।

दूसरे राउंड में आर-पार के लिए उतरीं

अंशु मलिक ने कहा कि अंतिम राउंड में अटैक करके जीतना चाहती थीं। दूसरे राउंड में तो यही था कि आज जो भी होगा देखा जाएगा। हाथ टूटे या कुछ भी हो, लेकिन पीछे नहीं हटना। हाथ अलग तो होने से रहा, जो भी होगा देख लेंगे। काश ट्रेनिंग अच्छी हुई और चोट नहीं लगी होती तो जो मन में रह गया वह पूरा कर लेती। मन में काश रह जाता है, वह भी नहीं रहता। जितनी क्षमता थी वह पूरी लगाई।

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